नेतन्याहू की पार्टी का अरब पार्टी पर बड़ा आरोप, कहा- चुनाव में हुई चोरी; जांच की मांग

Edited By Updated: 28 Oct, 2026 11:28 PM

netanyahu s party makes a serious allegation against the arab party

इजरायल में हुए आम चुनावों के बाद राजनीतिक भूचाल आ गया है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने मंगलवार को हुए चुनावों में अरब पार्टियों पर चुनाव चुराने का बड़ा आरोप लगाया है। पार्टी ने चुनाव प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर...

तेल अवीव : इजरायल में हुए आम चुनावों के बाद राजनीतिक भूचाल आ गया है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने मंगलवार को हुए चुनावों में अरब पार्टियों पर चुनाव चुराने का बड़ा आरोप लगाया है। पार्टी ने चुनाव प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं में धांधली करने और उन्हें डराने-धमकाने का दावा किया है।

intelligence एजेंसी 'शिन बेट' और पुलिस जांच की मांग
लिकुड पार्टी ने बयान जारी कर इन आरोपों को लेकर इजरायली पुलिस और देश की खुफिया एजेंसी 'शिन बेट' से तुरंत जांच कराने की मांग की है। पार्टी ने अपने बयान में कहा है कि चुनाव जीतने के लिए रिश्वतखोरी, धमकियां, हिंसा, फर्जीवाड़ा और मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए अवैध सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल जैसे गंभीर अपराध किए गए हैं। इसके साथ ही लिकुड पार्टी ने आरोप लगाया कि ये अरब पार्टियां आतंकवाद का समर्थन करती हैं और यहूदी राष्ट्र को खत्म करना चाहती हैं।

अरब पार्टियों का ऐतिहासिक प्रदर्शन, नेसेट में बहुमत से दूर नेतन्याहू 
सामने आ रहे चुनाव परिणामों में 93 प्रतिशत तक मतों की गिनती पूरी हो चुकी है और लगभग 6 लाख दोहरे लिफाफे वाले मतपत्रों की गिनती अभी बाकी है। अब तक के आंकड़ों के मुताबिक, अरब पार्टियां 18 से 19 सीटों पर जीत हासिल करती दिख रही हैं, जो कि अब तक का एक ऐतिहासिक आंकड़ा है।

इस परिणाम के बाद नेतन्याहू का समर्थक गुट और उनके विरोधी यहूदी दल, दोनों ही संसद (नेसेट) में बहुमत के आंकड़े से काफी दूर नजर आ रहे हैं। संसद में नेतन्याहू समर्थित गुट को 53 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि विरोधी गुट को 67 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है।

'इजरायली समाज नस्लवादी है': बालाद गुट के प्रमुख सामी अबू शहादेह 
चुनाव परिणामों और लिकुड पार्टी के आरोपों पर पलटवार करते हुए बालाद गुट के प्रमुख सामी अबू शहादेह ने कहा कि इस चुनाव को प्रधानमंत्री नेतन्याहू की हार के रूप में न देखे जाने का एकमात्र कारण इजरायली समाज का नस्लवादी होना है। उन्होंने कहा कि इजरायली समाज इतना नस्लवादी है कि वह अरब नेतृत्व वाली पार्टियों को विपक्ष का हिस्सा मानने को भी तैयार नहीं है।

गठबंधन से इनकार से गहरा सकता है राजनीतिक गतिरोध 
विपक्ष के 67 सांसदों में गहरा विभाजन देखने को मिल रहा है। इनमें यहूदी नेतृत्व वाली पार्टियों को 48 सीटें मिली हैं, जबकि अरब नेतृत्व वाली पार्टियों ने 19 सीटों पर जीत दर्ज की है। ज्यादातर यहूदी नेतृत्व वाली पार्टियों ने अरब दलों के साथ किसी भी प्रकार का राजनीतिक गठबंधन करने से साफ इनकार कर दिया है। इस स्थिति से देश में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक गतिरोध पैदा होने के आसार बन गए हैं, हालांकि राजनीतिक मतभेद भुलाकर नई सरकार बनाने का एक मौका अब भी विपक्षी दलों के पास मौजूद है

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