पूर्व भारतीय उच्चायुक्त का दावाः बांग्लादेश में नई सरकार अवामी लीग पर से हटा सकती बैन ! बदलेंगे सियासी समीकरण

Edited By Updated: 14 Feb, 2026 02:34 PM

new pm of b desh will think of lifting ban on awami league veena sikri

बांग्लादेश चुनावों के बाद पूर्व भारतीय उच्चायुक्त वीणा सिकरी ने संकेत दिया कि नई सरकार अवामी लीग पर लगा प्रतिबंध हटा सकती है। वहीं शेख हसीना ने चुनाव को धांधलीपूर्ण बताते हुए नतीजों की वैधता को चुनौती दी है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चुनाव प्रक्रिया पर...

International Desk: बांग्लादेश में हालिया चुनावों के बाद राजनीतिक परिदृश्य को लेकर अहम संकेत सामने आए हैं। बांग्लादेश में भारत की पूर्व उच्चायुक्त Veena Sikri ने कहा है कि नई सरकार का प्रधानमंत्री अवामी लीग पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाने पर विचार कर सकता है।  वीणा सिकरी ने कहा कि चुनाव परिणाम आने के बाद यह मुद्दा नई सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हो सकता है। उन्होंने बताया कि चुनाव में Bangladesh Nationalist Party (BNP) गठबंधन और Jamaat-e-Islami गठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला, हालांकि अंततः BNP गठबंधन बेहतर प्रदर्शन करने में सफल रहा।

 

वीणा सिकरी के मुताबिक, जमात-ए-इस्लामी ने लंबे समय में अपने वोट बैंक को मजबूत किया और खुद को अच्छी तरह संगठित किया, जिसके चलते मुकाबला बेहद करीबी हो गया। उन्होंने BNP को दो-तिहाई बहुमत हासिल करने पर बधाई देते हुए इसे एक बड़ी राजनीतिक उपलब्धि बताया। इस बीच, Sheikh Hasina, जो Awami League की अध्यक्ष हैं, ने 12 फरवरी को हुए चुनावों की वैधता को खुली चुनौती दी है। उन्होंने इन चुनावों को बांग्लादेश के लोकतंत्र के लिए “शर्मनाक अध्याय” करार दिया। शेख हसीना ने अपने बयान में आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान व्यापक प्रशासनिक हेरफेर और आंकड़ों में धांधली की गई।

 

उन्होंने कहा कि मतदान केंद्रों पर मतदाता नजर नहीं आ रहे थे, लेकिन मतगणना के दौरान भारी संख्या में वोट सामने आए। उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों को अविश्वसनीय बताते हुए कहा कि सुबह 11 बजे तक मतदान प्रतिशत 14.96% था, जो महज एक घंटे में बढ़कर 32.88% हो गया। उनके अनुसार, इसका मतलब यह हुआ कि पूरे देश में प्रति मिनट करीब 3.8 लाख वोट डाले गए, जो व्यावहारिक रूप से असंभव है। विशेषज्ञों का मानना है कि अवामी लीग पर प्रतिबंध हटाने का फैसला बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा मोड़ ला सकता है, लेकिन चुनावी धांधली के आरोपों के चलते नई सरकार के सामने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ना तय है।

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