Edited By Sanjeev,Updated: 22 Oct, 2026 07:52 AM

कुवैत के झंडे वाले तेल टैंकर 'M/T अल दसमा' (M/T Al Dasma) पर, जिसमें 21 भारतीय नाविक सवार थे, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरते समय किसी अज्ञात वस्तु से हमला हुआ। केंद्रीय बंदरगाह जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बताया कि...
नई दिल्ली : कुवैत के झंडे वाले तेल टैंकर 'M/T अल दसमा' (M/T Al Dasma) पर, जिसमें 21 भारतीय नाविक सवार थे, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरते समय किसी अज्ञात वस्तु से हमला हुआ। केंद्रीय बंदरगाह जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बताया कि जहाज के सभी क्रू सदस्य सुरक्षित हैं। यह घटना बुधवार 21 अक्टूबर (स्थानीय समय) को हुई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अधिकारी स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए हैं।
सोनोवाल ने 'X' (ट्विटर) पर जानकारी देते हुए कहा, '21 अक्टूबर को कुवैत के झंडे वाले तेल टैंकर 'M/T अल दसमा' पर, जिसमें 21 भारतीय नाविक सवार थे, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते समय किसी अज्ञात वस्तु से हमला हुआ। हमारे सभी 21 भारतीय क्रू सदस्य और बाकी क्रू सदस्य पूरी तरह सुरक्षित हैं।' उन्होंने आगे कहा, 'हम लगातार स्थिति पर नजर रख रहे हैं और अपने नाविकों की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने के लिए जहाज प्रबंधन कंपनी के साथ लगातार संपर्क में हैं।'
यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने भी ओमान के बुखा (Bukha) से 11 नॉटिकल मील पश्चिम में इस हमले को ट्रैक किया। 'टाइम्स कुवैत' के अनुसार इस घटना के कारण जहाज पर आग लग गई थी, जिसे बाद में बुझा दिया गया। रिपोर्ट में बताया गया है कि टैंकर अपनी जगह पर ही रुका रहा और सभी क्रू सदस्य सुरक्षित बताए गए। यह हमला खाड़ी क्षेत्र में कमर्शियल शिपिंग (व्यावसायिक जहाजरानी) से जुड़ी हालिया घटनाओं के बीच हुआ है।
इससे पहले 16 अक्टूबर को कच्चे तेल के टैंकर 'MT ST 3' पर, जिसमें 15 भारतीय नाविक सवार थे, होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी वस्तु से हमला हुआ था। सोनोवाल ने बताया था कि सभी भारतीय नागरिक सुरक्षित थे और किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं थी। मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के बीच भारत ने समुद्री आवाजाही और कमर्शियल शिपिंग पर होने वाले हमलों की बार-बार निंदा की है।
भारत ने कई मौकों पर दोहराया है कि कमर्शियल शिपिंग और नाविकों पर होने वाले सभी हमले "कानूनी और नैतिक रूप से अनुचित" हैं। साथ ही भारत ने समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता और "अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों के जरिए समुद्री व्यापार के सुरक्षित और निर्बाध प्रवाह" की आवश्यकता पर भी जोर दिया है।