Edited By Tanuja,Updated: 03 Jun, 2026 03:58 PM

सूडान में जारी गृहयुद्ध के बीच महिलाओं के अपहरण, यौन गुलामी, सामूहिक बलात्कार और फिरौती वसूली के गंभीर आरोप सामने आए हैं। पीड़ित महिलाओं ने बताया कि उन्हें महीनों तक कैद रखकर प्रताड़ित किया गया। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि युद्ध में यौन हिंसा को...
International Desk: अफ्रीकी देश Sudan में जारी गृहयुद्ध के दौरान महिलाओं के खिलाफ अपहरण, बलात्कार और यौन गुलामी जैसे गंभीर अपराधों के आरोप सामने आए हैं। पीड़ित महिलाओं का कहना है कि उन्हें अगवा कर महीनों तक कैद में रखा गया, जहां उनके साथ लगातार यौन उत्पीड़न किया गया। समाचार एजेंसी एपी से बातचीत में एक महिला ने बताया कि अपहरणकर्ताओं ने उसे दो दिन तक बिना भोजन और पानी के नग्न अवस्था में रखा। इसके बाद उसे फोन देकर कहा गया कि अपने परिवार से फिरौती मंगवाओ, अन्यथा जान से मार दिया जाएगा।
रिहाई की मांगी कीमत
पीड़िताओं के अनुसार, उनके परिवारों से हजारों डॉलर की फिरौती मांगी गई। पैसे मिलने के बाद ही उन्हें रिहा किया गया। महिलाओं का कहना है कि कैद के दौरान उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से बुरी तरह प्रताड़ित किया गया। हालांकि इन व्यक्तिगत बयानों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी युद्ध के दौरान महिलाओं के खिलाफ व्यापक यौन हिंसा की घटनाओं का दस्तावेजीकरण किया है।
अर्धसैनिक संगठन बने जल्लाद
तीनों महिलाओं ने इन अपराधों के लिए अर्धसैनिक संगठन Rapid Support Forces (आरएसएफ) को जिम्मेदार ठहराया है। आरएसएफ और Sudanese Armed Forces के बीच अप्रैल 2023 से भीषण संघर्ष जारी है, जिसने देश को मानवीय संकट की ओर धकेल दिया है। संयुक्त राष्ट्र (United Nations) और विभिन्न मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि युद्ध में शामिल लगभग सभी पक्षों पर यौन हिंसा के आरोप लगे हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में आरएसएफ और उससे जुड़े सशस्त्र समूहों का नाम सामने आया है।
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों के अनुसार
- महिलाओं और किशोरियों का अपहरण किया गया।
- उन्हें यौन गुलामी में रखा गया।
- सामूहिक बलात्कार की घटनाएं दर्ज की गईं।
- रिहाई के लिए परिवारों से पैसे वसूले गए।
- कई पीड़िताएं नाबालिग थीं।
युद्ध का सबसे खतरनाक मानवीय संकट
विशेषज्ञों का कहना है कि सूडान में यौन हिंसा केवल अपराध नहीं बल्कि युद्ध की रणनीति का हिस्सा बनती जा रही है। इसका उद्देश्य समुदायों में डर पैदा करना, लोगों को विस्थापित करना और सामाजिक ढांचे को तोड़ना है।सूडान में लाखों लोग पहले ही अपने घर छोड़ चुके हैं और देश दुनिया के सबसे बड़े मानवीय संकटों में से एक का सामना कर रहा है।