Edited By Tanuja,Updated: 21 May, 2026 07:06 PM

पाकिस्तान के लाहौर में 14 वर्षीय ईसाई लड़की निशा बीबी के कथित अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और शादी का मामला सामने आया है। परिवार का आरोप है कि एक 41 वर्षीय मुस्लिम व्यक्ति ने उसकी मानसिक और स्वास्थ्य स्थिति का फायदा उठाया। मामला पाकिस्तान में...
International Desk: पाकिस्तान के लाहौर में एक 14 वर्षीय ईसाई लड़की के कथित अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और शादी का मामला सामने आने के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार, निशा बीबी नाम की लड़की, जो मिर्गी और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थी, 12 मई को काम से घर वापस नहीं लौटी। लड़की के पिता Abbas Masih ने बताया कि उनकी बेटी लाहौर की गुलबहार कॉलोनी में एक मुस्लिम परिवार के घर घरेलू सहायिका के रूप में काम करती थी। जब वह वापस नहीं लौटी, तो परिवार ने उसके कार्यस्थल पर जाकर पूछताछ की। वहां बताया गया कि वह पहले ही जा चुकी है। इसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। CCTV फुटेज में निशा को एक मध्यम आयु के व्यक्ति के साथ जाते हुए देखा गया।
परिवार के मुताबिक इलाके की एक महिला ने उस व्यक्ति की पहचान अपने 41 वर्षीय पति Arshad Habib के रूप में की। महिला ने दावा किया कि उसका पति उसी दिन अपने दो बच्चों के साथ गायब हो गया था। परिवार का आरोप है कि आरोपी पहले से तीन शादियां कर चुका है और कई बच्चों का पिता है। पीड़ित परिवार का कहना है कि बाद में पुलिस ने उन्हें कुछ दस्तावेज दिखाए, जिनमें दावा किया गया था कि निशा ने स्वेच्छा से इस्लाम कबूल किया। उसने आरोपी से अपनी मर्जी से शादी की। उसकी उम्र 18 साल बताई गई। परिवार और उनके वकीलों ने इन दस्तावेजों को फर्जी बताया है। परिवार की वकील Zunara Patrick ने आरोप लगाया कि आरोपी धर्म का इस्तेमाल कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए कर रहा है। उन्होंने कहा कि आरोपी को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के रहीम यार खान जिले में खोजा गया, जहां वह कथित तौर पर निशा और अपने बच्चों के साथ रह रहा था।
वकील ने अदालत में याचिका दाखिल कर आरोपी की एक अन्य पत्नी के बच्चों की बरामदगी की भी मांग की है। रिपोर्ट में एक और मामले का जिक्र किया गया, जिसमें पंजाब प्रांत के जरांवाला शहर की 15 वर्षीय ईसाई लड़की सिदरा बीबी के अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन का आरोप लगा था। परिवार का कहना था कि हथियारबंद लोग घर में घुसकर लड़की को उठा ले गए, लेकिन बाद में दस्तावेज दिखाकर दावा किया गया कि उसने स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन और शादी की है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि पाकिस्तान में ईसाई और हिंदू अल्पसंख्यक समुदायों की नाबालिग लड़कियों के जबरन धर्म परिवर्तन और शादी के आरोप लगातार सामने आते रहे हैं।