Edited By Tanuja,Updated: 28 Jul, 2026 01:36 PM

पाकिस्तान में ऑनर किलिंग की घटनाएं गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार 2025 में कम से कम 470 महिलाओं की हत्या हुई। सिंध की 20 वर्षीय खालिदा चांदियो की कथित ऑनर किलिंग ने इस सामाजिक बुराई, जिरगा व्यवस्था और कमजोर न्याय...
International Desk: पाकिस्तान में तथाकथित 'ऑनर किलिंग' (इज्जत के नाम पर हत्या) की घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, वर्ष 2025 में देशभर में ऐसी घटनाओं में कम से कम 470 महिलाओं की हत्या दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि कई मामलों की रिपोर्ट ही नहीं होती या उन्हें आत्महत्या अथवा दुर्घटना बताकर दर्ज कर दिया जाता है। सिंध प्रांत की 20 वर्षीय खालिदा चांदियो की कथित ऑनर किलिंग ने पूरे पाकिस्तान को झकझोर दिया। पुलिस के अनुसार, खालिदा पर 'कारी' (अवैध संबंध का आरोप) लगाया गया और स्थानीय कबायली पंचायत (जिरगा) के फैसले के बाद उन्हें घर से बाहर ले जाकर गोली मार दी गई।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। खालिदा के पिता मोहम्मद रमजान और मां नबुल ने कहा कि उनकी बेटी की चीखें आज भी उनका पीछा नहीं छोड़तीं। पुलिस का आरोप है कि खालिदा की हत्या उसके दादा और मामा ने एक स्थानीय कबायली बुजुर्ग के आदेश पर की। इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक अन्य आरोपी की तलाश जारी है। हालांकि पाकिस्तान की अदालतें जिरगा को आपराधिक मामलों में फैसला सुनाने से रोक चुकी हैं, लेकिन मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि सिंध के ग्रामीण इलाकों में आज भी ऐसे अनौपचारिक पंचायतों का प्रभाव बना हुआ है और महिलाओं से जुड़े मामलों में इनके फैसलों के आधार पर हिंसा होती है।
चिंताजनक आंकड़े
मानवाधिकार आयोग पाकिस्तान (HRCP) के अनुसार, 2025 में कम से कम 470 ऑनर किलिंग के मामले दर्ज हुए। इनमें 126 मामले केवल सिंध प्रांत से सामने आए। सिंध सुहाई साथ संस्था के अनुसार, 1 जनवरी से 20 जून 2025 के बीच सिंध में 112 महिलाओं की ऑनर किलिंग दर्ज की गई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कई बार महिलाओं पर 'कारी' का आरोप केवल सामाजिक सम्मान का मुद्दा नहीं होता, बल्कि जमीन, विरासत या कबायली दुश्मनी से जुड़े विवादों को निपटाने के लिए भी लगाया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इन मामलों में आरोपी अक्सर परिवार के सदस्य ही होते हैं।
गवाह अदालत में बयान देने से पीछे हट जाते हैं और पीड़ित परिवार पर समझौते का दबाव बनाया जाता है। कमजोर जांच और प्रभावशाली लोगों के राजनीतिक दबाव के कारण कई मामलों में दोषियों को सजा नहीं मिल पाती।रिपोर्ट में एक शिक्षिका का भी उल्लेख है, जिसने अपनी पसंद से शादी करने के बाद परिवार की धमकियों से बचने के लिए अपना घर छोड़ दिया। वह वर्षों से अपने पति और बच्चों के साथ लगातार ठिकाना बदल रही है। उसका कहना है कि उसे हर दस्तक पर डर लगता है कि कहीं परिवार वाले उसे ढूंढते हुए न पहुंच जाएं।