बड़ा खुलासाः ईरान को अमरिका के साथ वार्ता टेबल तक लाया चीन, पर्दे के पीछे निभाई अहम भूमिका

Edited By Updated: 14 Apr, 2026 07:28 PM

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पूर्व राजनयिक विद्या भूषण सोनी के अनुसार, ईरान-अमेरिका वार्ता (Iran US talks) में चीन ने अहम लेकिन पर्दे के पीछे भूमिका निभाई। हालांकि कोई समझौता नहीं हुआ, लेकिन बातचीत को आगे बढ़ाना बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य इस पूरे...

International Desk: भारत के पूर्व वरिष्ठ राजनयिक विद्या भूषण सोनी (Vidya Bhushan Soni) ने  ईरान और अमेरिका के बीच हालिया वार्ता में चीन की अहम लेकिन पर्दे के पीछे भूमिका पर बड़ा खुलासा किया है।उनके मुताबिक, यह एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि है कि ईरान बातचीत की मेज पर आया। सोनी ने कहा कि भले ही इस्लामाबाद में हुई वार्ता में कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ, लेकिन बातचीत का होना ही एक बड़ी सफलता है।  विद्या भूषण सोनी  का मानना है कि इतने संवेदनशील मुद्दों पर पहली ही बैठक में समझौता होना संभव नहीं होता और इसके लिए कई दौर की बातचीत जरूरी होती है।

 

सोनी ने बताया कि अमेरिका और ईरान दोनों “मैक्सिमलिस्ट” यानी कठोर शुरुआती मांगों के साथ वार्ता में पहुंचे थे, जिन्हें स्वीकार करना आसान नहीं था। लेकिन असली बातचीत टेबल के पीछे, यानी अनौपचारिक बैठकों और साइडलाइन चर्चाओं में हुई। सोनी के अनुसार, इस वार्ता का सबसे अहम मुद्दा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) रहा। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार और शिपिंग के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ईरान के लिए हॉर्मुज़ उसका सबसे बड़ा “बर्गेनिंग चिप” है, क्योंकि इस पर नियंत्रण रखकर वह अमेरिका पर दबाव बना सकता है। वहीं Donald Trump के लिए इस जलमार्ग को खुलवाना उनकी रणनीतिक सफलता का पैमाना बन गया है।

 

सोनी ने यह भी बताया कि 21 घंटे तक चली इस वार्ता ने एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया, क्योंकि करीब 47-48 साल बाद इतने उच्च स्तर पर दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत हुई। हालांकि अभी भी कुछ प्रमुख मुद्दों पर गतिरोध बना हुआ है, लेकिन ईरान की ओर से यह स्वीकार करना कि कई बिंदुओं पर प्रगति हुई है, एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।  इस बीच, हालात की संवेदनशीलता तब और सामने आई जब एक चीनी स्वामित्व वाला जहाज हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने में सफल रहा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि क्षेत्र में तनाव के बावजूद समुद्री गतिविधियां पूरी तरह ठप नहीं हुई हैं। कुल मिलाकर, यह मामला दिखाता है कि वैश्विक राजनीति में कूटनीति, शक्ति संतुलन और रणनीतिक हित किस तरह एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
 

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