Edited By Tanuja,Updated: 06 Apr, 2026 12:05 PM

डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर अपशब्दों भरे धमकी बयान के बाद अमेरिकी राजनीति में हड़कंप मच गया। कई नेताओं ने उनके मानसिक संतुलन पर सवाल उठाए। होर्मुज जलडमरूमध्य संकट और युद्ध के बीच बयानबाजी से तनाव और बढ़ गया है।
Washington: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने बयान को लेकर विवादों में हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर ईरान को लेकर अपशब्दों से भरी धमकी दी, जिससे अमेरिकी राजनीति में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। ट्रंप ने अपने पोस्ट में लिखा कि “मंगलवार ईरान के लिए पावर प्लांट और ब्रिज डे होगा,” जिसे सीधे तौर पर वहां के ऊर्जा और परिवहन ढांचे पर हमले की चेतावनी माना जा रहा है। वर प्लांट और ब्रिज डे होगा,” जिसे वहां के ऊर्जा और परिवहन ढांचे पर संभावित हमले की चेतावनी माना जा रहा है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर संकट जारी है। यह दुनिया का सबसे अहम तेल-गैस मार्ग है, जो अमेरिका और इजराइल की सैन्य कार्रवाई के बाद लगभग बंद है।
इससे दुनिया भर में ऊर्जा कीमतें बढ़ गई हैं। ईरान की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया आई है। राष्ट्रपति कार्यालय के अधिकारी मेहदी तबातबाई ने कहा कि ईरान तभी जलडमरूमध्य खोलेगा जब उसे युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा मिलेगा। उन्होंने ट्रंप के बयान को गुस्से और हताशा का नतीजा बताया।अमेरिका के अंदर भी ट्रंप के बयान की जमकर आलोचना हो रही है। अमेरिकी सीनेट के सदस्य और डेमोक्रेटिक पार्टी के वरिष्ठ नेता चक शूमर ने कहा कि यह बयान असंतुलित सोच को दर्शाता है और इससे अमेरिका के सहयोगी दूर हो सकते हैं।
मार्जोरी टेलर ग्रीन ने इसे “पागलपन” बताया और हस्तक्षेप की मांग की। इसके अलावा अमेरिकी राजनीतिज्ञ और वरमोंट से जूनियर संयुक्त राज्य सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने इसे खतरनाक बताया। उन्होंने कहा कि एपस्टीन संकट और ईरान युद्ध में मनचाहे नतीजे न मिलने के बाद, ऐसा लगता है कि ट्रंप के दिमाग को लकवा मार गया है और वो मानसिक रूप से पंगु हो गए हैं। वह अकेले ही दुनिया को एक खतरनाक तबाही की ओर ले जा रहे हैं। कांग्रेस को इस स्थिति पर ज़रूर ध्यान देना चाहिए। क्रिस मर्फी ने 25वें संशोधन की बात उठाई, जबकि सासंद रो खन्ना और टिम केन ने भी कड़ी आलोचना की। जेक औचिनक्लॉस ने इसे रणनीतिक विफलता कहा। इस बीच, ट्रंप ने नाटो से अमेरिका को बाहर निकालने की धमकी भी दी है, क्योंकि कई यूरोपीय देश इस युद्ध में शामिल नहीं होना चाहते।