Edited By Anu Malhotra,Updated: 05 Jun, 2026 08:58 AM

ब्रिटेन (UK) में भारतीय मूल की ब्रिटिश महिला Varsha Gohil को अपने एक्स पति Bhadresh Gohil से तलाक के मुआवजे के तौर पर 6.6 मिलियन पाउंड (लगभग 85 करोड़ रुपये) का भारी-भरकम भुगतान मिला है। इस फैसले ने यह साफ कर दिया है कि अदालत में झूठ बोलने और अपनी...
इंटरनेशनल डेस्क: ब्रिटेन (UK) में भारतीय मूल की ब्रिटिश महिला Varsha Gohil को अपने एक्स पति Bhadresh Gohil से तलाक के मुआवजे के तौर पर 6.6 मिलियन पाउंड (लगभग 85 करोड़ रुपये) का भारी-भरकम भुगतान मिला है। इस फैसले ने यह साफ कर दिया है कि अदालत में झूठ बोलने और अपनी संपत्ति छिपाने वाले पार्टनर को कानून कभी नहीं बख्शता।
इस पूरे कानूनी मामले की शुरूआत साल 2002 में शुरू हुई थी, जब तीन बच्चों की मां वर्षा गोहिल ने अपने पति भद्रेश के अनुचित व्यवहार और बेवफाई (Cheating) से परेशान होकर तलाक की अर्जी दी थी। उस वक्त भद्रेश ने चालाकी दिखाते हुए अपनी असली दौलत छिपा ली। शुरुआती वित्तीय समझौता बेहद साधारण था, जिसमें वर्षा ने महज 2.70 लाख पाउंड (करीब 3.5 करोड़ रुपये) और परिवार की एक पुरानी प्यूज़ो (Peugeot) कार लेकर अलग होना स्वीकार कर लिया। हालांकि, वर्षा को हमेशा से शक था कि उनके पति ने अपनी पूरी जायदाद और कमाई का खुलासा अदालत के सामने नहीं किया है, लेकिन उस समय उनके पास इसे साबित करने के लिए कोई पुख्ता सबूत नहीं थे।
एक बड़े घोटाले ने खोल दी पति की पोल
तलाक के कई सालों बाद अचानक बाजी पलट गई। वर्षा का शक तब हकीकत में बदल गया जब भद्रेश गोहिल का नाम नाइजीरिया के एक पूर्व गवर्नर (जेम्स इबोरी) से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मनी लॉन्ड्रिंग के एक बहुत बड़े घोटाले में सामने आया। अधिकारियों की जांच में पता चला कि भद्रेश एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा थे, जो फर्जी ऑफशोर कंपनियों और क्लाइंट खातों के जरिए करोड़ों पाउंड की हेराफेरी कर रहा था। साल 2011 में ब्रिटिश अदालत ने भद्रेश को धोखाधड़ी, जालसाजी और मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश का दोषी पाते हुए 10 साल जेल की सजा सुना दी।
बंद पड़ा केस दोबारा खुला, सुप्रीम कोर्ट ने दिया ऐतिहासिक फैसला
आपराधिक जांच के दौरान सरकारी वकीलों ने भद्रेश की दुनिया भर में फैली लगभग 28 मिलियन पाउंड (करीब 360 करोड़ रुपये) की बेनामी संपत्तियों को फ्रीज (जब्त) कर लिया। इन संपत्तियों का मूल तलाक के केस के दौरान कहीं कोई जिक्र नहीं था। इन नए खुलासों के दम पर वर्षा गोहिल ने अपने पुराने तलाक के मामले को दोबारा खोलने के लिए लंबी अदालती लड़ाई लड़ी। यह विवाद UK Supreme Court तक जा पहुंचा। साल 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने एक नजीर बनने वाला फैसला सुनाते हुए वर्षा को केस दोबारा खोलने की इजाजत दी। जजों ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, "यदि कोई जीवनसाथी जानबूझकर अपनी संपत्तियों को छिपाता है या बेईमानी करता है, तो कानून उसे उस बेईमानी का फायदा उठाने की इजाजत कभी नहीं दे सकता।"
केस दोबारा खुलने के बाद भी वर्षा की राह आसान नहीं थी। ब्रिटेन की क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (सरकारी अभियोजन पक्ष) का तर्क था कि जब्त की गई सारी संपत्ति अपराध और काले धन से कमाई गई है, इसलिए इसे सरकार को जब्त कर लेना चाहिए। दूसरी तरफ, वर्षा का दावा था कि इस संपत्ति का कुछ हिस्सा शादी के दौरान कानूनी और वैध व्यापार से कमाया गया था, इसलिए इस पर उनका वैवाहिक अधिकार (Matrimonial Property) बनता है। वहीं, दोषी भद्रेश अदालत में यह पैंतरा चल रहा था कि यह संपत्तियां उसकी हैं ही नहीं।
हाई कोर्ट का अंतिम फैसला: भद्रेश को बताया 'महाबेईमान'
अंततः यह मामला हाई कोर्ट पहुंचा, जहां जस्टिस विलियम्स ने जब्त संपत्ति के हर एक हिस्से की बारीकी से जांच की। जज ने पाया कि पूरी संपत्ति में से करीब 6.66 मिलियन पाउंड की दौलत पूरी तरह 'बेदाग' और legitimate sources से अर्जित की गई थी, जिसे साझा matrimonial property माना गया। अदालत ने यह पूरी रकम वर्षा गोहिल को सौंपने का आदेश दिया। फैसला सुनाते हुए जस्टिस विलियम्स ने भद्रेश गोहिल की कड़ी आलोचना की और कहा, "बेईमानी और उसके बुरे नतीजों के मामले में इस पति का आचरण सबसे निचले स्तर का है। वह हर मोड़ पर पूरी तरह झूठा साबित हुआ है।" कोर्ट ने यह भी कहा कि 'गोहिल' केस का नाम दुनिया भर के वकीलों और जजों के जेहन में हमेशा रहेगा क्योंकि इसने कानून का एक बेहद पेचीदा रास्ता तय किया है।
हाल ही में यूके की Court of Appeal ने स्पष्ट कर दिया है कि इस फैसले के खिलाफ अब आगे कोई अपील स्वीकार नहीं की जाएगी, जिसके साथ ही यह 24 साल पुरानी कानूनी लड़ाई वर्षा गोहिल की शानदार जीत के साथ समाप्त हो गई।