Edited By Pardeep,Updated: 15 Aug, 2026 10:34 PM

पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने देश के अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय को लेकर एक बेहद विवादित और आपत्तिजनक बयान दिया है। भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण अक्सर 'मिस्टर 10 परसेंट' के नाम से बुलाए जाने वाले जरदारी ने...
इस्लामाबादः पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने देश के अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय को लेकर एक बेहद विवादित और आपत्तिजनक बयान दिया है। भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण अक्सर 'मिस्टर 10 परसेंट' के नाम से बुलाए जाने वाले जरदारी ने इस्लामाबाद में आयोजित एक समारोह के दौरान कहा कि हम (मुस्लिम) उस मानसिकता के हैं जो देश की 3 से 4 प्रतिशत हिंदू आबादी को "बर्दाश्त" करते हैं। यह समारोह पाकिस्तान द्वारा वर्ष 2025 में भारत के साथ हुए लघु-युद्ध (मिनी-वॉर) 'मार्का-ए-हक' में अपनी कथित जीत के उपलक्ष्य में बनाए गए 'यादगार-ए-फतह विजय स्मारक' पर आयोजित किया गया था। जरदारी ने यह भी दावा किया कि भारतीय अखंड भारत के अपने ही एजेंडे में विश्वास करते हैं और उनके मन में एक अलग दृष्टिकोण है।
आंकड़ों की खुली पोल
राष्ट्रपति जरदारी के 3-4 प्रतिशत हिंदुओं के दावे की पोल खुद पाकिस्तान की वर्ष 2023 की आधिकारिक जनगणना के आंकड़े खोलते हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान में हिंदुओं की वास्तविक संख्या केवल 52.1 लाख (यानी कुल आबादी का मात्र 2.17 प्रतिशत) ही है, जो जरदारी के दावे से काफी कम है। पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के अनुसार, इस आबादी में 38.68 लाख 'हिंदू जाति' के लोग और 13.49 लाख 'अनुसूचित जाति' के लोग शामिल हैं। राष्ट्रपति द्वारा देश के एक अल्पसंख्यक समुदाय के लिए "बर्दाश्त" (Tolerate) शब्द का इस्तेमाल करना यह दर्शाता है कि पाकिस्तान के संविधान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा और समानता के जो वादे किए गए हैं, वे पूरी तरह से खोखले हैं।
दावों के उलट भयानक उत्पीड़न की हकीकत
इस विजय स्मारक समारोह में जरदारी ने दावा किया कि पाकिस्तान के हिंदू पूरी तरह स्वतंत्र हैं और वे भारत के बजाय पाकिस्तान में रहना ज्यादा पसंद करेंगे। लेकिन पाकिस्तान का मानवाधिकार रिकॉर्ड इस दावे को पूरी तरह खारिज करता है। पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग (HRCP) की 2025 की रिपोर्ट और अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) की रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान में हिंदू, ईसाई और अहमदिया समुदाय लगातार हिंसक हमलों, भेदभाव और उत्पीड़न का शिकार हो रहे हैं।
विशेष रूप से सिंध और पंजाब प्रांतों में नाबालिग हिंदू और ईसाई लड़कियों का अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और जबरन निकाह के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इसी धार्मिक उत्पीड़न और असुरक्षा के कारण पिछले एक दशक में दर्जनों हिंदू परिवारों को मजबूरन पाकिस्तान छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी है। इसके अलावा, ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) की 2025 की रिपोर्ट भी बताती है कि पाकिस्तान के क्रूर ईशनिंदा कानूनों के चलते अल्पसंख्यकों के खिलाफ भीड़ द्वारा की जाने वाली हिंसा तेज हुई है और वहां का प्रशासन दोषियों पर कार्रवाई करने में पूरी तरह विफल रहा है।
भारत में तीखी प्रतिक्रिया
जरदारी के इस गैर-जिम्मेदाराना बयान पर भारत में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। केरल उच्च न्यायालय के अधिवक्ता रोहित मदस्सेरिल ने तीखा हमला बोलते हुए इसे 'मानसिक विक्षिप्तता' (साइकोसिस) का एक भयावह रूप बताया है। वहीं, आब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) के शोधकर्ता और लेखक अमित कृष्णकांत पॉल ने इसे अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि आजादी के इतने साल बाद भी पाकिस्तानी राष्ट्रपति स्वतंत्रता दिवस जैसे मौके पर भारत का नाम लेकर नफरत और विभाजन की राजनीति कर रहे हैं।
इस बीच, राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि जरदारी का यह भड़काऊ बयान ऐसे समय में आया है, जब देश के शक्तिशाली सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की नजर राष्ट्रपति की कुर्सी पर टिकी हुई है और जरदारी अपनी सत्ता बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।