Edited By Tanuja,Updated: 23 Jul, 2026 11:46 AM

यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने दो सऊदी तेल टैंकरों पर हमला करने और सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी लागू करने का दावा किया है। इससे रेड सी और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे वैश्विक तेल मार्गों पर संकट गहरा गया है और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में...
इंटरनेशनल डेस्क: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक नया संकट खड़ा हो गया है। ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने दो सऊदी तेल टैंकरों पर हमला किया है। साथ ही हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी (Naval Blockade) लागू करने का भी ऐलान किया है। हूतियों का कहना है कि यह कार्रवाई क्षेत्र में जारी संघर्ष और अमेरिका समर्थित सैन्य गतिविधियों के जवाब में की गई है। हालांकि, सऊदी अरब की ओर से इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हूतियों की नाकाबंदी लंबे समय तक जारी रहती है, तो दुनिया के दो सबसे अहम समुद्री तेल मार्ग रेड सी (लाल सागर) और होर्मुज जलडमरूमध्य दोनों पर एक साथ खतरा पैदा हो सकता है। इन दोनों रास्तों से वैश्विक कच्चे तेल और गैस की बड़ी मात्रा दुनिया भर में पहुंचती है। यदि हमलों और समुद्री तनाव में और बढ़ोतरी होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है।
इससे दुनिया के कई देशों में ईंधन महंगा होने और सप्लाई चेन प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। लाल सागर पहले से ही कई जहाजों पर हुए हमलों के कारण संवेदनशील बना हुआ है। अब हूतियों द्वारा सऊदी टैंकरों को निशाना बनाने और समुद्री नाकाबंदी की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय नौवहन कंपनियां और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।