Edited By rajesh kumar,Updated: 17 Sep, 2023 07:26 PM

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने रविवार को कहा कि 'पीएम विश्वकर्मा' योजना भारत के सभ्यतागत लोकाचार और पारंपरिक शिल्प कौशल का एक आदर्श मिश्रण प्रस्तुत करती है।
नेशनल डेस्क: केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने रविवार को कहा कि 'पीएम विश्वकर्मा' योजना भारत के सभ्यतागत लोकाचार और पारंपरिक शिल्प कौशल का एक आदर्श मिश्रण प्रस्तुत करती है और इसके माध्यम से कारीगरों को मुख्यधारा में लाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 'विश्वकर्मा जयंती' के अवसर पर 'पीएम विश्वकर्मा' योजना की शुरुआत की और इसके तहत पारंपरिक शिल्पकारों और कारीगरों को बिना किसी गारंटी के न्यूनतम ब्याज दर पर ऋण सहायता प्रदान की जाएगी।
प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री सिंह ने यहां कहा, ‘‘भारत की विकास यात्रा में यह एक ऐतिहासिक दिन है, जब नरेन्द्र मोदी द्वारा 'पीएम विश्वकर्मा' की शुरुआत के साथ भारत की विशिष्ट परिसंपत्ति, पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को मुख्यधारा में लाया जा रहा है।'' सिंह कहा कि यह योजना रोजी रोटी कमाने का विकल्प प्रदान करती है, साथ ही, भारत की सदियों पुरानी 'गुरु-शिष्य परंपरा' को कायम रखती है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ने की संस्कृति पेश की है और चंद्रयान मिशन इसका सबसे उत्कृष्ट उदाहरण है। मंत्री ने कहा, ‘‘चंद्रमा मिशन को 'चंद्रयान', इसके लैंडर को 'विक्रम' और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाले स्थान को 'शिवशक्ति' नाम देना भारत के सभ्यतागत लोकाचार के संरक्षण का सबसे अच्छा उदाहरण है।''
उन्होंने कहा कि पारंपरिक कारीगर समाज के अभिन्न अंग हैं, क्योंकि उन्होंने भारत की सदियों पुरानी परंपराओं और शिल्प को जीवित रखा है। सिंह ने कहा कि 10 करोड़ उज्ज्वला कनेक्शन, स्वच्छ भारत मिशन के तहत 12 करोड़ शौचालय, जल जीवन मिशन के तहत 13 करोड़ पानी के कनेक्शन, आयुष्मान भारत के तहत 18 करोड़ स्वास्थ्य कार्ड, मुद्रा ऋण और प्रधानमंत्री किसान निधि इस बात का प्रमाण है कि यह सरकार उन लोगों के लिए समर्पित है, जिन्हें पिछली सरकारों ने मुख्यधारा से बाहर कर दिया था