Edited By Pardeep,Updated: 12 Jan, 2026 01:30 AM
करीब 20 साल तक फरार रहने वाला कुख्यात अपराधी आबिद अली उर्फ राजू उर्फ ‘रहमान डकैत’ आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। शुक्रवार को सूरत क्राइम ब्रांच ने गुजरात के ललगेट इलाके में गुप्त ऑपरेशन चलाकर उसे बिना गोली चलाए गिरफ्तार कर लिया।
नेशनल डेस्कः करीब 20 साल तक फरार रहने वाला कुख्यात अपराधी आबिद अली उर्फ राजू उर्फ ‘रहमान डकैत’ आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। शुक्रवार को सूरत क्राइम ब्रांच ने गुजरात के ललगेट इलाके में गुप्त ऑपरेशन चलाकर उसे बिना गोली चलाए गिरफ्तार कर लिया। राजू भोपाल के कुख्यात ‘ईरानी डेरा’ से चलने वाले एक बहुराज्यीय अपराध गिरोह का कथित सरगना है। पुलिस को इनपुट मिला था कि भोपाल से फरार होने के बाद वह सूरत में छिपा हुआ है और किसी बड़ी वारदात की तैयारी कर रहा है। इसी सूचना पर जाल बिछाकर उसे दबोचा गया।
14 राज्यों में फैला था राजू का अपराध नेटवर्क
पुलिस के मुताबिक, राजू ईरानी का गिरोह भारत के कम से कम 14 राज्यों में सक्रिय था। यह गिरोह, डकैती, ठगी, उगाही, सरकारी अफसर बनकर छापे, आगजनी और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर अपराध करता था। महाराष्ट्र में उस पर मकोका जैसे सख्त कानून के तहत भी केस दर्ज हैं।
साधु, पुलिस, CBI – हर रूप में करता था ठगी
राजू अपराध करने के लिए भेस बदलने में माहिर था। कभी वह फर्जी CBI अफसर,कभी पुलिस अधिकारी और कभी साधु बनकर लोगों को ठगता था। वह बुजुर्गों और धार्मिक लोगों को खास तौर पर निशाना बनाता था। पुलिस के अनुसार उसका तरीका बिल्कुल फिल्म ‘स्पेशल 26’ जैसा था – नकली अधिकारी बनकर छापा डालो और पैसा वसूलो।
भोपाल कोर्ट में पेश, 17 जनवरी तक पुलिस रिमांड
रविवार को निशातपुरा पुलिस उसे प्रोडक्शन वारंट पर भोपाल लाई और जिला अदालत में पेश किया गया। कोर्ट ने उसे 17 जनवरी तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया। राजू ने खुद को निर्दोष बताया। उसके वकील ने कहा कि यह सब गलत है और वे जमानत की अर्जी देंगे।
पुलिस बोली – बेहद चालाक और झूठा अपराधी
पुलिस का कहना है कि राजू बार-बार बयान बदलता है, खुद को छोटा अपराधी दिखाता है और गिरोह का सरगना होने से इनकार करता है, लेकिन सच्चाई यह है कि वह कई राज्यों में हत्या के प्रयास, आगजनी, ठगी और लूट के मामलों में वांछित है।
ईरानी डेरा: 6 से ज्यादा गिरोह, सबकी डोर राजू के हाथ में
भोपाल की अमन कॉलोनी के ईरानी डेरा में कम से कम 6 बड़े अपराधी गिरोह सक्रिय थे — कोई नकली सोना बेचता, कोई फर्जी अफसर बनता, कोई चोरी-डकैती करता, कोई मोबाइल चोरी करता और दो गिरोह जमीन घोटाले में लगे थे, इन सबको चलाता था राजू ईरानी।
छापों में मिले दर्जनों मोबाइल और लैपटॉप
पुलिस ने छापों में मोबाइल फोन, लैपटॉप, सीपीयू और पेन ड्राइव जब्त किए हैं। इनका इस्तेमाल चोरी के मोबाइल अनलॉक करने और डिजिटल सबूत मिटाने में होता था।
फर्जी जमानत से अपराधी हो जाते थे बाहर
27–28 दिसंबर की रात पुलिस ने छापा मारकर 22 पुरुष और 10 महिलाओं को पकड़ा था। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि 48 घंटे में ही 14 आरोपी बाहर आ गए, यहां तक कि एक जमानतदार ऐसा था जिसकी दो साल पहले मौत हो चुकी थी।
1970 से चल रहा है ईरानी गिरोह
यह गिरोह 1970 के दशक से सक्रिय है। राजू के पिता हसमत ईरानी इसके पहले सरगना थे। 2006 में राजू ने कमान संभाली। यहां अपराध के आधार पर रुतबा मिलता है – जितना बड़ा अपराध, उतनी बड़ी हैसियत। लगभग 70 परिवार इस डेरे से जुड़े हैं और शायद ही कोई परिवार हो जिसका कोई सदस्य अपराध में शामिल न हो।
अब सलाखों के पीछे है ‘रहमान डकैत’
20 साल तक पुलिस को चकमा देने वाला रहमान डकैत अब जेल में है। लेकिन उसका दाहिना हाथ काला ईरानी अब भी फरार है। अब देखना होगा कि क्या कानून उसे हमेशा के लिए रोक पाएगा या वह फिर किसी जमानत या फर्जी दस्तावेज से भाग निकलता है। फिलहाल, दो दशकों बाद खौफ का यह साया गिर चुका है।