Saturday Special : शनि की साढ़ेसाती से हैं परेशान ? कोयले का ये रामबाण उपाय बदल देगा किस्मत

Edited By Updated: 10 Jan, 2026 01:23 PM

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Saturday Special : ज्योतिष शास्त्र और लाल किताब में शनि देव को न्याय का देवता और कर्मफल प्रदाता माना गया है। जब शनि की साढ़ेसाती, ढैया या कुंडली में शनि दोष होता है, तो व्यक्ति को मानसिक, शारीरिक और आर्थिक कष्टों का सामना करना पड़ता है। शास्त्रों में...

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Saturday Special : ज्योतिष शास्त्र और लाल किताब में शनि देव को न्याय का देवता और कर्मफल प्रदाता माना गया है। जब शनि की साढ़ेसाती, ढैया या कुंडली में शनि दोष होता है, तो व्यक्ति को मानसिक, शारीरिक और आर्थिक कष्टों का सामना करना पड़ता है। शास्त्रों में शनि के दोषों को दूर करने के लिए कई उपाय बताए गए हैं, जिनमें कोयले का उपयोग अत्यंत प्रभावशाली और रामबाण माना जाता है। कोयला सीधे तौर पर शनि के तत्व पृथ्वी और उसके रंग काले का प्रतिनिधित्व करता है।

शनि देव और कोयले का गहरा संबंध
शनि एक तामसिक ग्रह है जिसका प्रभाव गहरा और भारी होता है। कोयला, जो लकड़ी के जलने के बाद का अंतिम अवशेष होता है, शनि की ऊर्जा को सोखने की अद्भुत क्षमता रखता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, जिस प्रकार कोयला अग्नि को सहन कर स्वयं काला हो जाता है, उसी प्रकार यह हमारे जीवन के दुखों और शनि के नकारात्मक प्रभावों को अपने अंदर समाहित कर लेता है।

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बहते जल में कोयला प्रवाहित करना
यह उपाय विशेष रूप से उन लोगों के लिए है जो शनि की साढ़ेसाती या ढैया से गुजर रहे हैं। यदि आपके काम बनते-बनते बिगड़ रहे हैं या आप भारी मानसिक तनाव महसूस कर रहे हैं, तो यह उपाय करें। एक सवा किलो साबुत कोयला (लकड़ी वाला) लें। ध्यान रहे कि कोयला टूटा-फूटा या चूरा न हो। शनिवार के दिन शाम के समय इस कोयले को अपने सिर से पैर तक 21 बार वार लें।

वारते समय ॐ शं शनैश्चराय नमः मंत्र का जाप करें। इसके बाद, इस कोयले को किसी पवित्र बहती नदी में प्रवाहित कर दें।

लाभ: बहता पानी गति का प्रतीक है। जैसे-जैसे कोयला पानी के साथ आगे बढ़ेगा, आपके जीवन की रुकावटें दूर होने लगेंगी। यह उपाय शनि की 'जड़ता' को खत्म कर जीवन में गति प्रदान करता है।

घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर करने के लिए कोयले का उपयोग
अक्सर शनि दोष के कारण घर में क्लेश, बीमारियां और दरिद्रता का वास हो जाता है। कोयला नकारात्मक ऊर्जा को सोखने वाला सबसे शक्तिशाली प्राकृतिक फिल्टर माना जाता है।

एक मिट्टी के पात्र में थोड़े से कच्चे कोयले के टुकड़े रखें। इन टुकड़ों पर थोड़ा सा काला तिल और सरसों का तेल डालें। इसे शनिवार की रात को अपने घर के किसी अंधेरे कोने में या दक्षिण दिशा में रख दें। अगले दिन इस सामग्री को चुपचाप घर से बाहर ले जाकर किसी सुनसान जगह पर मिट्टी में दबा दें या पीपल के पेड़ के नीचे रख आएं।

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लाभ: यह उपाय घर की 'नजर' उतारने और वास्तु दोषों को कम करने में मदद करता है। इससे घर में सुख-शांति आती है और परिवार के सदस्यों के बीच बढ़ रहा तनाव कम होता है।

नजर दोष और शनि की बुरी दृष्टि के लिए 'कोयले का तिलक'
यदि आपको लगता है कि किसी की बुरी नजर के कारण आपकी सेहत या तरक्की रुक गई है, तो शनि देव की शरण में कोयले का यह सरल उपाय चमत्कार कर सकता है।

शनिवार के दिन शनि मंदिर जाएं। वहां शनि देव की प्रतिमा के सामने एक छोटा कोयले का टुकड़ा अर्पित करें। मंदिर से वापस आते समय उस कोयले को थोड़ा सा पीसकर उसका चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में थोड़ा सरसों का तेल मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें। इस पेस्ट से अपने घर के मुख्य द्वार के दोनों तरफ एक छोटी बिंदी या स्वास्तिक बना दें।

लाभ: मुख्य द्वार पर कोयले का यह प्रयोग एक 'सुरक्षा कवच' की तरह काम करता है। यह किसी भी नकारात्मक शक्ति या शनि की क्रूर दृष्टि को घर के भीतर प्रवेश करने से रोकता है।

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