Edited By Parveen Kumar,Updated: 08 Mar, 2026 07:19 PM

ईरान और इजरायल के बीच जारी सैन्य टकराव का असर अब लेबनान तक पहुंच गया है। लगातार हो रही बमबारी और सैन्य कार्रवाई से वहां हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक पिछले एक सप्ताह में हमलों के दौरान करीब 400 लोगों की मौत हो...
इंटरनेशनल डेस्क : ईरान और इजरायल के बीच जारी सैन्य टकराव का असर अब लेबनान तक पहुंच गया है। लगातार हो रही बमबारी और सैन्य कार्रवाई से वहां हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक पिछले एक सप्ताह में हमलों के दौरान करीब 400 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 80 से अधिक बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं और कई इलाकों में भारी तबाही देखने को मिल रही है।
दक्षिणी लेबनान में सबसे ज्यादा नुकसान
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि इजरायली हमलों का सबसे ज्यादा असर दक्षिणी लेबनान के इलाकों में देखा गया है। कई रिहायशी इलाकों में इमारतें क्षतिग्रस्त हो गई हैं और नागरिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। लगातार बढ़ते घायलों के कारण अस्पतालों पर भी काफी दबाव बढ़ गया है और राहत-बचाव टीमें लगातार काम कर रही हैं।
इजरायली सेना ने जारी की नई चेतावनी
इसी बीच इजरायली रक्षा बल (आईडीएफ) ने दक्षिणी लेबनान के लोगों के लिए सख्त चेतावनी जारी की है। सेना का कहना है कि इलाके में हिज्बुल्लाह की गतिविधियों के कारण सैन्य कार्रवाई की जा रही है। आईडीएफ के मुताबिक उनका लक्ष्य नागरिक नहीं बल्कि हिज्बुल्लाह के ठिकाने और हथियार हैं, लेकिन सुरक्षा के मद्देनजर लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।
लितानी नदी के दक्षिण में रहने वालों को खाली करने की अपील
इजरायली सेना ने विशेष रूप से लितानी नदी के दक्षिण में रहने वाले लोगों से अपने घर छोड़कर उत्तर दिशा की ओर जाने को कहा है। सेना का कहना है कि इस क्षेत्र में हिज्बुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाकर अभियान चलाया जा रहा है, जिससे यहां रहना लोगों के लिए खतरनाक हो सकता है।
क्षेत्र में बढ़ा तनाव, दुनिया की नजरें हालात पर
लगातार बढ़ते हमलों और मौतों के आंकड़ों ने पूरे क्षेत्र में तनाव को और गहरा कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी हालात पर नजर बनाए हुए है और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर पूरे मिडिल ईस्ट क्षेत्र पर पड़ सकता है।