Edited By Radhika,Updated: 01 Jul, 2026 01:28 PM

दिल्ली की राजनीति गलियारों में बड़ी हलचल चल रही है। ऐसी खबरें सामने आ रही हैं कि मोदी कैबिनेट में बदलाव होने वाला है। आगामी 2029 के चुनावों को ध्यान में रखते हुए टीम के नए रुप को तैयार किया जा रहा है। इसी के साथ ऐसी संभावना जताई जा रही है कि आगामी...
नेशनल डेस्क: दिल्ली की राजनीति गलियारों में बड़ी हलचल चल रही है। ऐसी खबरें सामने आ रही हैं कि मोदी कैबिनेट में बदलाव होने वाला है। आगामी 2029 के चुनावों को ध्यान में रखते हुए टीम के नए रुप को तैयार किया जा रहा है। इसी के साथ ऐसी संभावना जताई जा रही है कि आगामी मानसून सत्र से पहले केंद्रीय कैबिनेट का नया स्वरूप सामने आ सकता है। पीएम मोदी द्वारा हाल ही में केंद्रीय सचिवों द्वारा की गई एक लंबी बैठक के बाद ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि इस दौरान सभी विभागों के रिपोर्ट कार्ड देखे गए हैं।
10 सीटों का गणित और संगठन का दबाव
जानकारी के लिए बता दें कि मौजूदा समय में मोदी मंत्रिमंडल में कुल 72 मंत्री हैं। इनमें 30 कैबिनेट, 5 राज्य मंत्री और 36 राज्य मंत्री शामिल हैं। लोकसभा के नियमों के अनुसार अधिकतम 81 मंत्री बनाए जा सकते हैं, जिसका मतलब है कि 9 पद पहले से खाली हैं। इसके अलावा, जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे और पंकज चौधरी (यूपी बीजेपी अध्यक्ष) व हर्ष मल्होत्रा (दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष) को सांगठनिक जिम्मेदारी मिलने के बाद करीब 10 से अधिक पदों पर नए चेहरों की एंट्री तय मानी जा रही है। खराब प्रदर्शन करने वाले कुछ मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी भी संभव है।
'बागी' सांसदों का फैक्टर और बदलता संख्याबल
हाल ही में टीएमसी के 20 लोकसभा संसद 'एनसीपीआई' के बैनर तले एनडीए सरकार के समर्थन में आ चुके हैं। इसके अलावा आप के 7 राज्यसभा संसद, शिवसेना के 6 लोकसभा सांसद भी इस पलड़े में आ चुके हैं। यहीं पर कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन बागी गुटों और राघव चड्ढा के साथ टूटकर आए नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह देकर बीजेपी भविष्य के लिए अपनी स्थिति और मजबूत करना चाहती है।
7 चुनावी राज्यों और सामाजिक समीकरणों पर नजर
जानकारी के लिए बता दें कि अगले साल उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, गोवा और मणिपुर समेत 7 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में सरकार सोशल इंजीरियरिंग का खास ध्यान रखेगी।