पाकिस्तान के पंजाब में ऐतिहासिक गुरुद्वारा ढहाया गया, सिख समुदाय ने जताया विरोध

Edited By Updated: 02 Jul, 2026 12:29 AM

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पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक स्थानीय व्यवसायी द्वारा दशकों पुराने ऐतिहासिक गुरुद्वारे को ढहा दिए जाने के बाद अल्पसंख्यक सिख समुदाय ने कड़ा विरोध प्रदर्शन किया है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। पंजाब सरकार के एक अधिकारी के अनुसार, लाहौर...

नेशनल डेस्क : पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक स्थानीय व्यवसायी द्वारा दशकों पुराने ऐतिहासिक गुरुद्वारे को ढहा दिए जाने के बाद अल्पसंख्यक सिख समुदाय ने कड़ा विरोध प्रदर्शन किया है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। पंजाब सरकार के एक अधिकारी के अनुसार, लाहौर से करीब 70 किलोमीटर दूर फरूकाबाद स्थित ऐतिहासिक 'गुरुद्वारा सिंह सभा' को हाल ही में एक स्थानीय व्यवसायी ने ध्वस्त कर दिया।

अधिकारी ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया, "व्यवसायी ने संबंधित विभाग से आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त किए बिना ही गुरुद्वारे को ढहा दिया। संबंधित विभाग ने इस मामले पर तब तक संज्ञान नहीं लिया, जब तक कि क्षेत्र के सिखों ने इसका विरोध नहीं किया।" उन्होंने बताया कि इलाके में सिख समुदाय के विरोध प्रदर्शन के बाद पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने इस मामले पर संज्ञान लिया है। पंजाब (पाकिस्तान) के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री रमेश सिंह अरोड़ा ने बुधवार को फरूकाबाद में 'गुरुद्वारा सिंह सभा' का दौरा किया और इसके तत्काल जीर्णोद्धार की घोषणा की।

अरोड़ा ने शेखूपुरा के उपायुक्त (डीसी), सहायक आयुक्त इमरान अली हर्ल, नगर समिति के मुख्य अधिकारी, औकाफ विभाग के अधिकारियों और अन्य लोगों के साथ घटनास्थल का निरीक्षण किया और स्थानीय सिखों की शिकायतें भी सुनीं। औकाफ विभाग पाकिस्तान का एक सरकारी विभाग है जो धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व की संपत्तियों, न्यासों और पूजा स्थलों की देखरेख, प्रबंधन और सुरक्षा करता है। मीडिया से बातचीत में अरोड़ा ने कहा कि औकाफ विभाग द्वारा दी गई प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, एक स्थानीय व्यवसायी ने संबंधित विभाग से एनओसी लिये बिना ही गुरुद्वारे को ढहा दिया था। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मरियम ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार अल्पसंख्यकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करने और हर परिस्थिति में उनके पूजा स्थलों को सुरक्षित रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

मंत्री ने औकाफ विभाग को निर्देश दिया कि वह उस जमीन के स्वामित्व और स्थिति की तत्काल जांच करे जिस पर गुरुद्वारा सिंह सभा स्थित थी। उन्होंने यह भी कहा कि शुरुआती जानकारी से संकेत मिलते हैं कि यह संपत्ति औकाफ भूमि के रूप में पंजीकृत नहीं थी। मंत्री ने कहा, "मैंने व्यक्तिगत रूप से स्थल का निरीक्षण किया है और संबंधित अधिकारियों को जल्द से जल्द तथ्यों पर आधारित रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।" 

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