Edited By Pooja Gill,Updated: 01 Apr, 2026 10:34 AM

Abdominal Obesity: भारत में महिलाओं में पेट की चर्बी तेजी से बढ़ रही है, जो एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है। एक अध्ययन के अनुसार, 30 से 49 साल की हर 10 में से 5 से 6 महिलाओं...
Abdominal Obesity: भारत में महिलाओं में पेट की चर्बी तेजी से बढ़ रही है, जो एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है। एक अध्ययन के अनुसार, 30 से 49 साल की हर 10 में से 5 से 6 महिलाओं में पेट के आसपास ज्यादा चर्बी (एब्डॉमिनल ओबेसिटी) पाई जा रही है। यह समस्या उम्र बढ़ने, शहरों में रहने, अधिक आय और नॉन-वेज खाने से जुड़ी बताई गई है।
क्या है इसका कारण?
यह शोध जर्नल Diabetes and Metabolic Syndrome: Clinical Research and Reviews में प्रकाशित हुआ है। इसमें बताया गया है कि भारत में पुरुषों की तुलना में महिलाओं में कमर का आकार ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है। यह एक छिपे हुए मेटाबॉलिक संकट का संकेत है। चिंता की बात यह है कि अब यह समस्या किशोरों और युवाओं, खासकर लड़कियों में भी बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बचपन में पोषण की कमी और बाद में अचानक बदलती जीवनशैली इसका एक बड़ा कारण है।
कई गंभीर बीमारियों का कारण बनती है पेट की चर्बी
पेट की चर्बी कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है, जैसे दिल की बीमारी, किडनी की समस्या, फैटी लिवर (MASLD), टाइप-2 डायबिटीज और कुछ कैंसर (जैसे ब्रेस्ट कैंसर)। इसलिए इसे समय रहते पहचानना बहुत जरूरी है।
कम BMI होने पर भी शरीर में हो सकता है ज्यादा फैट
विशेषज्ञों के अनुसार, केवल BMI (बॉडी मास इंडेक्स) से मोटापे का सही अंदाजा नहीं लगाया जा सकता, खासकर भारतीयों में। भारतीयों में कम BMI होने पर भी शरीर में ज्यादा फैट हो सकता है। इसलिए अब कमर का घेरा (waist circumference) और कमर-से-लंबाई का अनुपात (waist-to-height ratio) मापना ज्यादा जरूरी माना जा रहा है। अच्छी बात यह है कि पेट की चर्बी को मापना आसान है। इसे एक साधारण टेप से मापा जा सकता है और नियमित रूप से जांच करने से समय पर सावधानी बरती जा सकती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी तेजी से बढ़ रही समस्या
यह समस्या अब केवल शहरों या अमीर लोगों तक सीमित नहीं रही। ग्रामीण क्षेत्रों में भी तेजी से बढ़ रही है। NFHS-5 (2019-21) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में लगभग 40% महिलाएं और 12% पुरुष पेट की चर्बी से प्रभावित हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बढ़ती समस्या को रोकने के लिए स्वस्थ खान-पान, नियमित व्यायाम और समय-समय पर जांच बेहद जरूरी है।