Edited By Parveen Kumar,Updated: 05 Apr, 2026 08:22 PM

दुनिया में जब भी कोई बड़ा भू-राजनीतिक संकट आता है, निवेशक आमतौर पर सुरक्षित विकल्प के तौर पर सोने का रुख करते हैं। लेकिन मार्च 2026 में अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने इस पारंपरिक धारणा को झटका दिया है। मौजूदा हालात में सोने की बजाय अमेरिकी डॉलर...
नेशनल डेस्क : दुनिया में जब भी कोई बड़ा भू-राजनीतिक संकट आता है, निवेशक आमतौर पर सुरक्षित विकल्प के तौर पर सोने का रुख करते हैं। लेकिन मार्च 2026 में अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने इस पारंपरिक धारणा को झटका दिया है। मौजूदा हालात में सोने की बजाय अमेरिकी डॉलर निवेशकों की पहली पसंद बनकर उभरा है, जिसने बाजार के जानकारों को भी चौंका दिया है।
आंकड़ों ने बदली तस्वीर, सोने में बड़ी गिरावट
युद्ध की शुरुआत में 2 मार्च को सोने की कीमतों में एक दिन में 8,500 रुपये का उछाल देखा गया था, जिससे उम्मीद थी कि यह संकट में फिर से मजबूत प्रदर्शन करेगा। लेकिन यह तेजी ज्यादा समय तक टिक नहीं सकी। 23 मार्च तक सोने की कीमत गिरकर 1,35,846 रुपये पर पहुंच गई, जो अपने उच्चतम स्तर से करीब 14.3% की गिरावट दर्शाती है। वहीं, 2025 में कमजोर पड़ा डॉलर इंडेक्स अब मजबूती से वापसी कर रहा है और मार्च के दौरान इसमें 2% से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई है।
तेल संकट बना डॉलर की मजबूती की बड़ी वजह
विशेषज्ञों के मुताबिक डॉलर की मजबूती के पीछे सबसे बड़ा कारण ‘पेट्रोडॉलर’ सिस्टम है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की खरीद-फरोख्त डॉलर में होती है। होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाओं के कारण तेल सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे कीमतों में तेजी आई है। इसका सीधा असर यह हुआ कि तेल आयात करने वाले देशों को ज्यादा डॉलर की जरूरत पड़ रही है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ गई है।
इसके अलावा, बढ़ती तेल कीमतों ने महंगाई की चिंता को भी बढ़ा दिया है। ऐसे में अमेरिका में ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहने की संभावना है। उच्च ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड के चलते निवेशकों को डॉलर में बेहतर रिटर्न दिख रहा है, जबकि सोना कोई ब्याज नहीं देता- यही वजह है कि निवेशक फिलहाल डॉलर की ओर झुक रहे हैं।
क्या खत्म हो जाएगा सोने का दबदबा?
हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि यह स्थिति स्थायी नहीं है। लंबी अवधि में सोना अभी भी एक सुरक्षित निवेश बना रहेगा। अमेरिका की आर्थिक नीतियां, बढ़ता कर्ज और वैश्विक अनिश्चितता भविष्य में डॉलर पर दबाव डाल सकते हैं। ऐसे में जब भी वित्तीय अस्थिरता बढ़ेगी या मुद्राओं में कमजोरी आएगी, सोना फिर से निवेशकों के लिए सुरक्षित विकल्प बन सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
मौजूदा हालात में भले ही डॉलर मजबूत नजर आ रहा हो, लेकिन विशेषज्ञ संतुलित निवेश की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से घबराने की बजाय लंबी अवधि की रणनीति अपनानी चाहिए, जिसमें सोना अब भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।