अंखी दास ने फेसबुक से दिया इस्तीफा, एक पोस्ट को लेकर आई थीं चर्चा में

Edited By Updated: 27 Oct, 2020 08:23 PM

ankhi das resigns from facebook came to the discussion about a post

सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक की सार्वजनिक नीति मामलों की प्रमुख अंखी दास ने पद से इस्तीफा दे दिया है। वह सोशल मीडिया मंच पर नफरत फैलाने वाली टिप्पणियों को लेकर पाबंदी लगाने के मामले में कथित पक्षपात करने को लेकर चर्चा में थीं। ​​​​​​​फेसबुक के भारत में...

नई दिल्लीः सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक की सार्वजनिक नीति मामलों की प्रमुख अंखी दास ने पद से इस्तीफा दे दिया। वह सोशल मीडिया मंच पर नफरत फैलाने वाली टिप्पणियों पर रोक लगाने के मामले में कथित तौर पर पक्षपात बरतने को लेकर विवादों में थी। फेसबुक के भारत में प्रबंध निदेशक अजीत मोहन ने ई-मेल के जरिये बयान में कहा, ‘‘अंखी दास ने फेसबुक में अपने पद से हटने का निर्णय किया है। उन्होंने जन सेवा में अपनी रुचि के अनुसार काम करने के लिये यह कदम उठाया है। अंखी हमारे उन पुराने कर्मचारियों में शामिल हैं, जिन्होंने भारत में कंपनी को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभायी। वह पिछले नौ साल से अधिक समय से अपनी सेवा दे रही थी।''

दास पर ये आरोप लगे थे कि उन्होंने भाजपा और अन्य दक्षिण पंथी संगठनों के नफरत फैलाने वाले बयानों पर रोक लगाने से जुड़े नियमों को लागू करने का कथित रूप से विरोध किया था। उन पर ये भी आरोप लगे थे कि उन्होंने कंपनी के कर्मचारियों के फेसबुक ग्रुप पर कई साल तक भारतीय जनता पार्टी के समर्थन में संदेश पोस्ट किये। उन्होंने मामला प्रकाश में आने के करीब ढाई महीने बाद पद से इस्तीफा दिया है। चालीस से अधिक मानवाधिकार संगठनों और इंटरनेट पर नजर रखने वाले संगठनों ने फेसबुक से दास को तब तक छुट्टी पर भेजने को कहा था, जब तक कंपनी अपने भारतीय परिचालन के ऑडिट का काम पूरा नहीं कर लेती। दास 2011 में फेसबुक से जुड़ी थी।

मोहन ने कहा, ‘‘वह पिछले दो साल से मेरी टीम का हिस्सा थी। उन्हें जो भूमिका दी गयी थी, उन्होंने शानदार योगदान दिया। हम उनकी सेवा के आभारी हैं और उन्हें भविष्य के लिये शुभकामनाएं देते हैं।'' दास ने कहा कि उन्होंने फेसबुक से इस्तीफा देने का निर्णय किया है ताकि जन सेवा में अपनी व्यक्तिगत रूचि के अनुसार काम कर सके। फेसबुकक ने उनके इस्तीफे को विवादस्पद मामले से नहीं जोड़ा है। लेकिन कहा है कि कंपनी में मंगलवार उनका आखिरी दिन था।

दास को लेकर विवाद 15 अगस्त को वाल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ। रिपोर्ट में उन पर आरोप लगाया गया कि अंखी दास ने भाजपा अैर अन्य हिंदू संगठनों से जुड़े नेताओं के नफरत फैलाने वाली टिप्पणियों के खिलाफ कार्रवाई को बाधित किया।

रिपोर्ट के अनुसार भाजपा के 2014 में लोकसभा चुनाव जीतने के एक दिन पहले दास ने लिखा था, ‘‘हमने उनके सोशल मीडिया अभियान की हवा निकाल दी और बाकी निश्चित रूप से इतिहास है।'' उन्होंने यह भी लिखा कि नरेंद्र मोदी मजबूत नेता हैं, जिन्होंने पूर्व सत्तारूढ़ दल के किले को ध्वस्त कर दिया। वाल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अंखी दास ने 2012 के विधानसभा चुनावों के लिये भाजपा को सोशल मीडिया अभियान के लिये प्रशिक्षित किया। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने लिखा, ‘‘हमारे गुजरात अभियान में सफलता।''

 

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