Edited By Anu Malhotra,Updated: 24 Oct, 2026 10:02 AM

अरुणाचल प्रदेश में असाफिला और लोंगजू के सीमावर्ती इलाके, भारत और चीन के बीच 'लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल' (LAC) को लेकर अलग-अलग धारणाओं के कारण संवेदनशील बने हुए हैं। हालांकि, ज़मीनी स्तर पर स्थिति स्थिर और नियंत्रण में है। अरुणाचल प्रदेश के तक्सिंग...
नई दिल्ली: अरुणाचल प्रदेश में असाफिला और लोंगजू के सीमावर्ती इलाके, भारत और चीन के बीच 'लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल' (LAC) को लेकर अलग-अलग धारणाओं के कारण संवेदनशील बने हुए हैं। हालांकि, ज़मीनी स्तर पर स्थिति स्थिर और नियंत्रण में है। अरुणाचल प्रदेश के तक्सिंग सर्कल में मौजूद इन दो इलाकों में समय-समय पर तनाव की स्थिति बन जाती है, क्योंकि नियमित गश्त के दौरान भारतीय और चीनी सैनिक एक-दूसरे के आमने-सामने आ जाते हैं। सूत्रों के अनुसार, इन इलाकों में सुरक्षा के माहौल के बीच ऐसी घटनाएं अक्सर होती रहती हैं।
सूत्रों ने बताया कि दोनों पक्षों के सैनिकों के बीच किसी हिंसक टकराव की कोई खबर नहीं है। उन्होंने कहा कि ज़मीनी कमांडर संयम बरत रहे हैं और स्थिति को अपने नियंत्रण में रखे हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक, स्थानीय स्तर पर होने वाले आमना-सामने के टकरावों को सुलझाने के लिए पहले से तय सैन्य तंत्र का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें 'फ्लैग मीटिंग' और हॉटलाइन के ज़रिए बातचीत शामिल है। इन माध्यमों का मकसद स्थानीय तनाव को कम करना और ऐसी घटनाओं को बढ़ने से रोकना है।
सूत्रों ने पूर्वोत्तर में 'कोर कमांडर' स्तर की बातचीत का भी ज़िक्र किया। इसे इस क्षेत्र में उच्च-स्तरीय बातचीत को एक संस्थागत रूप देने की दिशा में एक अहम कदम बताया गया है। अधिकारियों का कहना है कि सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए दोनों पक्षों के बीच लगातार बातचीत ज़रूरी है, खासकर उन इलाकों में जहाँ LAC को लेकर दोनों देशों की समझ अलग-अलग है। उन्होंने यह भी कहा कि विवादित इलाकों में तनाव बढ़ने से कूटनीतिक बातचीत और वार्ताओं की ज़रूरत बढ़ सकती है, ताकि सीमा से जुड़े लंबित मुद्दों को सुलझाया जा सके।
सूत्रों ने बताया कि दूरदराज के सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा बलों की मौजूदगी के साथ-साथ, वहाँ बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। विकास कार्यों में हर मौसम में काम आने वाली सड़कें, पुल, दूरसंचार नेटवर्क और नागरिक सुविधाएं शामिल हैं, जिनसे सुरक्षा बलों और स्थानीय निवासियों दोनों को फायदा होगा। बेहतर कनेक्टिविटी से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे दूरदराज के सीमावर्ती गांवों में रहने वाले समुदायों के लिए आत्मनिर्भर बनने के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
अधिकारियों का कहना है कि बेहतर बुनियादी ढांचे से भविष्य में सीमा पर नियंत्रित व्यापार और लोगों के बीच आपसी संपर्क को बढ़ावा मिल सकता है, बशर्ते सुरक्षा और कूटनीतिक हालात इसके अनुकूल हों। इस क्षेत्र का सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व भी है। इसमें ऐतिहासिक 'त्सारी' तीर्थ यात्रा मार्ग शामिल है, जो सीमा के दोनों ओर रहने वाले बौद्ध समुदायों के लिए पवित्र है।
सूत्रों के अनुसार, यदि स्थिरता बनी रहती है, तो भविष्य में सीमा पार तीर्थ यात्रा की संभावनाओं पर विचार किया जा सकता है। ऐसी कोई भी व्यवस्था सुरक्षा स्थितियों और दोनों देशों के बीच होने वाले समझौते पर निर्भर करेगी।
सूत्रों ने आगे बताया कि सीमावर्ती इलाकों में सशस्त्र बलों की मौजूदगी से नागरिक-सैन्य पहलों को बढ़ावा मिला है। इनमें स्वास्थ्य शिविर लगाना, आपातकालीन स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना, स्कूलों का निर्माण करना और स्थानीय निवासियों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना शामिल है। इन पहलों का उद्देश्य दूर-दराज के आदिवासी इलाकों में लोगों की आवश्यक सेवाओं तक पहुंच को बेहतर बनाना और सुरक्षा बलों तथा स्थानीय समुदायों के बीच आपसी जुड़ाव को मजबूत करना है।
एक सूत्र ने कहा, "हालांकि LAC (वास्तविक नियंत्रण रेखा) को लेकर अलग-अलग धारणाओं के कारण असाफिला और लोंगजू संवेदनशील बने हुए हैं, लेकिन कुल मिलाकर स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।" उन्होंने यह भी कहा कि स्थिरता बनाए रखने के लिए सैन्य और राजनयिक तंत्र के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास भी महत्वपूर्ण है। भारत-चीन सीमा विवादों को स्थापित संचार माध्यमों और निरंतर बातचीत के जरिए सुलझाने के व्यापक प्रयासों के बीच, इन दो इलाकों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।