बांग्लादेश में अवामी लीग लीडर की जेल में संदिग्ध मौत, छात्र नेता की नृशंस हत्या ! अंतरिम सरकार पर उठे गंभीर सवाल

Edited By Updated: 01 Feb, 2026 05:26 PM

awami league leader dies in jail activist murdered in bangladesh

बांग्लादेश में अवामी लीग से जुड़े दो नेताओं की मौत ने अंतरिम सरकार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक वरिष्ठ नेता की जेल में इलाज के अभाव में मौत हुई, जबकि दूसरे पूर्व छात्र नेता की नृशंस हत्या कर दी गई। विपक्ष ने इसे राजनीतिक दमन बताया है।

Dhaka: बांग्लादेश में अवामी लीग से जुड़े दो नेताओं की अलग-अलग घटनाओं में मौत ने अंतरिम सरकार और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्टी नेताओं और परिजनों का आरोप है कि यह घटनाएं राजनीतिक दमन और लक्षित हिंसा का नतीजा हैं। चटगांव में अवामी लीग के वरिष्ठ नेता अब्दुर रहमान मिया (70) की जेल हिरासत में मौत हो गई। वे चटगांव सिटी अवामी लीग की वार्ड-24 (नॉर्थ अग्राबाद) इकाई के उपाध्यक्ष थे। परिजनों के अनुसार, मिया को उन्नत फेफड़ों के कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियां थीं, इसके बावजूद उन्हें जमानत नहीं दी गई और उचित चिकित्सा भी उपलब्ध नहीं कराई गई।

 

बताया गया है कि 17 नवंबर 2025 को उन्हें उस समय गिरफ्तार किया गया, जब वे नमाज पढ़ने के लिए घर से निकल रहे थे और चलने में भी असमर्थ थे। पुलिस ने उन्हें कोतवाली थाने में दर्ज एक मामले में हिरासत में लिया। परिवार का कहना है कि उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई और तीन महीने बाद हिरासत में ही उनकी मौत हो गई। अब तक अधिकारियों की ओर से मौत के कारणों पर कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है। दूसरी घटना नरसिंदी जिले की है, जहां अज़ीमुल कादेर भुइयां (45) का क्षत-विक्षत शव एक नाले से बरामद किया गया। वे पेशे से पोल्ट्री व्यवसायी थे और पहले अवामी लीग की छात्र शाखा छात्र लीग से जुड़े रहे थे।
तीन दिन पहले लापता हुए अज़ीमुल की हत्या से पार्टी समर्थकों में भारी आक्रोश है।

 

अवामी लीग नेताओं ने आरोप लगाया कि हत्या में जमात-ए-इस्लामी से जुड़े तत्वों का हाथ हो सकता है और अंतरिम सरकार ने दंडमुक्ति का माहौल बना दिया है। हालांकि पुलिस ने फिलहाल किसी राजनीतिक साजिश की पुष्टि नहीं की है और जांच जारी बताई है। इन दोनों घटनाओं के बाद विपक्षी दलों और मानवाधिकार संगठनों ने मनमानी गिरफ्तारियों, हिरासत में मौत और राजनीतिक हिंसा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है ताकि जिम्मेदारी तय हो सके और कानून का राज बहाल हो।

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