Edited By Anu Malhotra,Updated: 02 Jun, 2026 10:54 AM

How Baby Breathing in Womb: जब कोई महिला प्रेगनेंट होती है तो उसके मन में अक्सर यह सवाल आता है कि आखिर गर्भ में पल रहा बच्चा सांस कैसे लेता होगा? बता दे कि गर्भ में बच्चा पूरी तरह तरल पदार्थ (एमनियोटिक फ्लूइड) से घिरा होता है, इसलिए कई लोगों को लगता...
How Baby Breathing in Womb: जब कोई महिला प्रेगनेंट होती है तो उसके मन में अक्सर यह सवाल आता है कि आखिर गर्भ में पल रहा बच्चा सांस कैसे लेता होगा? बता दे कि गर्भ में बच्चा पूरी तरह तरल पदार्थ (एमनियोटिक फ्लूइड) से घिरा होता है, इसलिए कई लोगों को लगता है कि वह वहां कैसे जीवित रहता होगा। लेकिन कुदरत ने इसके लिए एक बेहद अद्भुत व्यवस्था बनाई हुई है।
मां की सांसों पर निर्भर होता है शिशु
गर्भावस्था के शुरुआती हफ्तों में भ्रूण का शरीर पूरी तरह विकसित नहीं होता और उसे फेफड़ों से सांस लेने की जरूरत भी नहीं पड़ती। जैसे-जैसे विकास होता है, बच्चे को ऑक्सीजन पहुंचाने का काम नाल (Umbilical Cord) और प्लेसेंटा करते हैं।
इस तरह बच्चा गर्भ में लेता है सांस
नाल सीधे प्लेसेंटा से जुड़ी होती है, जो मां के गर्भाशय से संपर्क में रहता है। मां जो ऑक्सीजन सांस के जरिए लेती है, वही ब्लड के जरिए से प्लेसेंटा तक पहुंचती है और फिर नाल के जरिए बच्चे के शरीर में पहुंचाई जाती है। इसी तरह बच्चे के शरीर से निकलने वाला कार्बन डाइऑक्साइड वापस मां के रक्त में पहुंचता है और सांस छोड़ते समय शरीर से बाहर निकल जाता है।
गर्भ में कब विकसित होते हैं फेफड़े?
बच्चे के फेफड़ों का विकास गर्भावस्था की शुरुआत से ही शुरू हो जाता है, लेकिन उनका पूर्ण विकास आमतौर पर 35 से 36 सप्ताह के आसपास होता है। गर्भावस्था के 24 से 36 सप्ताह के बीच फेफड़ों में एल्वियोली (Alveoli) नामक छोटे वायु थैले विकसित होने लगते हैं। यही थैले जन्म के बाद ऑक्सीजन ग्रहण करने में मदद करते हैं। यदि किसी कारणवश बच्चे का जन्म समय से पहले हो जाए तो फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं होते, जिससे नवजात को सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। ऐसे मामलों में डॉक्टर गर्भवती महिला को स्टेरॉयड इंजेक्शन देकर बच्चे के फेफड़ों के विकास को तेज करने की कोशिश करते हैं।
क्या बच्चा गर्भ में सांस लेने की कोशिश करता है?
गर्भ में मौजूद बच्चा लगभग 10 से 12 सप्ताह के बाद सांस लेने जैसी गतिविधियां शुरू कर देता है। हालांकि यह वास्तविक सांस नहीं होती। इन गतिविधियों के दौरान बच्चे के फेफड़ों में ऑक्सीजन नहीं जाती, बल्कि एमनियोटिक फ्लूइड अंदर-बाहर होता रहता है। यह एक तरह का अभ्यास होता है, जो जन्म के बाद सांस लेने की तैयारी माना जाता है।
क्या गर्भ में बच्चा डूब सकता है?
सामान्य परिस्थितियों में इसका जवाब 'नहीं' है। क्योंकि बच्चा फेफड़ों से सांस नहीं ले रहा होता और उसे ऑक्सीजन नाल के माध्यम से मिलती रहती है। इसलिए गर्भ में मौजूद तरल पदार्थ उसे नुकसान नहीं पहुंचाता। हालांकि यदि प्लेसेंटा या नाल में कोई गंभीर समस्या आ जाए तो बच्चे तक ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे उसके स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।
जन्म के समय क्या होता है?
जन्म के बाद बच्चे के सामने पूरी तरह नया वातावरण होता है। जैसे ही वह मां के शरीर से बाहर आता है, तापमान, हवा और अन्य बदलाव उसके शरीर को पहली बार खुद सांस लेने के लिए प्रेरित करते हैं। इसी समय उसके फेफड़े काम करना शुरू करते हैं और वह अपनी पहली सांस लेता है। कुछ मामलों में बच्चे के गले में नाल लिपटी हुई होती है, जिसे नुचल कॉर्ड (Nuchal Cord) कहा जाता है। यह स्थिति आम है और ज्यादातर मामलों में कोई गंभीर समस्या नहीं होती। डॉक्टर प्रसव के दौरान इसे सावधानी से हटा देते हैं।
वॉटर बर्थ में कैसे लेता है बच्चा पहली सांस?
आजकल कुछ महिलाएं पानी में प्रसव (Water Birth) का विकल्प चुनती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक बच्चा पानी से बाहर नहीं निकाला जाता, तब तक उसे ऑक्सीजन नाल के माध्यम से मिलती रहती है। इसलिए जन्म के तुरंत बाद पानी से बाहर लाने पर ही वह अपनी पहली सांस लेता है।
ऑक्सीजन की कमी कितनी खतरनाक?
यदि प्रसव के दौरान या जन्म के तुरंत बाद बच्चे को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती तो इसे हाइपोक्सिया (Hypoxia) कहा जाता है। यह स्थिति मस्तिष्क और शरीर के अन्य अंगों को नुकसान पहुंचा सकती है। गंभीर मामलों में सेरेब्रल पाल्सी, Permanent Disability या मृत्यु तक हो सकती है। हाइपोक्सिया के प्रमुख कारणों में नाल की समस्या, असामान्य प्रसव स्थिति, कंधे का फंस जाना या अत्यधिक रक्तस्राव शामिल हैं।