Edited By Anu Malhotra,Updated: 19 Sep, 2026 06:25 AM

सिलिकॉन वैली कहे जाने वाले शहर बेंगलुरु की सड़कें एक बार फिर भीषण जाम को लेकर चर्चा में हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक शख्स की पोस्ट ने शहर की खस्ताहाल ट्रैफिक व्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर पर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। हरी ने बताया कि...
बेंगलुरु: सिलिकॉन वैली कहे जाने वाले शहर बेंगलुरु की सड़कें एक बार फिर भीषण जाम को लेकर चर्चा में हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक शख्स की पोस्ट ने शहर की खस्ताहाल ट्रैफिक व्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर पर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। हरी ने बताया कि वर्तुर-गुंजुर मार्ग पर भारी जाम के कारण उनकी मासूम बेटी की स्कूल बस को महज 2 किलोमीटर की दूरी तय करने में पूरे 2 घंटे लग गए। इस दौरान वे घर पर लाचार महसूस करते हुए अपनी बच्ची का इंतजार करते रहे।
पीड़ित पिता ने अपना दर्द बयां करते हुए लिखा कि वे और उनकी पत्नी हर महीने लाखों रुपये का टैक्स देते हैं। उन्होंने सिर्फ इसलिए भारी भरकम होम लोन लेकर स्कूल के पास मकान खरीदा था ताकि बच्ची को आने-जाने में परेशानी न हो और उसका बचपन सुरक्षित रहे। पोस्ट में शख्स ने लिखा, "एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर सब कुछ सही करने के बाद भी, आज मैं खुद को अपने ही बच्चे की सुरक्षा करने में पूरी तरह असमर्थ पा रहा हूं। हमें सिर्फ अपने बच्चों के लिए सुरक्षित सड़कें चाहिए।"
यह घटना स्टेट हाईवे 35 (SH-35) पर वर्तुर और गुंजुर के बीच की है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस इलाके में खस्ताहाल सड़कें, गहरे गड्ढे, कछुआ गति से चल रहे बुनियादी ढांचे के काम और संकरे रास्ते दैनिक जाम का मुख्य कारण हैं।
बताया जा रहा है कि गुरुवार शाम को इस इलाके के स्कूलों से घर लौट रहे छात्र एक बड़े ट्रैफ़िक जाम में फंस गए थे। इस जाम का असर गुंजुर के पास SH-35 पर पड़ा, खासकर वर्तुर की ओर जाने वाले रास्ते पर। जाम में फंसी गाड़ियों में कई स्कूल बसें भी शामिल थीं, जिससे माता-पिता की चिंता और बढ़ गई। यह सड़क कई रिहायशी इलाकों और व्हाइटफ़ील्ड के बीच एक अहम कड़ी का काम करती है और रोज़ाना हज़ारों लोग और स्कूली बच्चे इसका इस्तेमाल करते हैं। पोस्ट पर दूसरे सोशल मीडिया यूज़र्स ने भी प्रतिक्रिया दी, कुछ लोगों ने कहा कि उन्हें भी ऐसे ही अनुभव हुए हैं। एक यूज़र ने कमेंट किया, "मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ।" एक और यूज़र ने इस स्थिति को "कड़वा सच" बताया।