Edited By Parveen Kumar,Updated: 31 Mar, 2026 08:08 PM

राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहां अनूपगढ़ के गांव 20 एलएम की रहने वाली कक्षा 12वीं (कला वर्ग) की छात्रा भावना ने संघर्ष और मेहनत की मिसाल पेश करते हुए 99% अंक हासिल किए हैं। भावना ने जिले में प्रथम स्थान प्राप्त...
नेशनल डेस्क : राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहां अनूपगढ़ के गांव 20 एलएम की रहने वाली कक्षा 12वीं (कला वर्ग) की छात्रा भावना ने संघर्ष और मेहनत की मिसाल पेश करते हुए 99% अंक हासिल किए हैं। भावना ने जिले में प्रथम स्थान प्राप्त कर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
सरकारी स्कूल से पढ़कर रचा इतिहास
आज के दौर में जहां अधिकतर अभिभावक अपने बच्चों को महंगे निजी स्कूलों में पढ़ाना बेहतर मानते हैं, वहीं भावना ने गांव के ही राजकीय विद्यालय से पढ़ाई कर यह उपलब्धि हासिल की। उसने बिना किसी ट्यूशन के केवल स्कूल की पढ़ाई और सेल्फ स्टडी के दम पर यह मुकाम हासिल किया। भावना के अनुसार, स्कूल के शिक्षकों का उसे पूरा सहयोग मिला। जब भी उसे पढ़ाई या जीवन से जुड़ी कोई परेशानी होती, शिक्षक उसे माता-पिता की तरह मार्गदर्शन देते थे, जिससे उसका आत्मविश्वास बढ़ा।
मजदूरी के बाद भी नहीं छोड़ी पढ़ाई
भावना का संघर्ष यहीं खत्म नहीं होता। वह रोजाना स्कूल से लौटने के बाद अपने परिवार के साथ मजदूरी करने जाती थी। सर्दियों में स्कूल की छुट्टी 3:30 बजे होने के बाद वह काम में हाथ बंटाती और घर लौटकर रात तक करीब 7 घंटे पढ़ाई करती थी। उसने अपनी दिनचर्या को इस तरह व्यवस्थित किया कि पढ़ाई के लिए पूरा समय मिल सके। इसी अनुशासन और निरंतर मेहनत का परिणाम है कि उसने शानदार अंक हासिल किए।
सीमित संसाधनों में भी नहीं टूटा हौसला
भावना के पिता आदूराम गांव के ही एक ईंट-भट्ठे पर मुनीम का काम करते हैं, जबकि उसकी मां राधा देवी गृहिणी होने के साथ-साथ बकरियां चराती हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति साधारण होने के बावजूद माता-पिता ने उसकी पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। भावना के पास खुद का मोबाइल भी नहीं था। जरूरत पड़ने पर वह अपने पिता का मोबाइल इस्तेमाल करती थी। उसने कभी सोशल मीडिया में समय बर्बाद नहीं किया और पूरी तरह अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित रखा।
RAS बनने का सपना, बच्चों को दिया संदेश
भावना ने बताया कि उसका सपना आरएएस (RAS) अधिकारी बनने का है, जिसके लिए वह आगे भी कड़ी मेहनत जारी रखेगी। उसने अन्य छात्रों को भी संदेश दिया कि सफलता पाने के लिए मेहनत के साथ-साथ एकाग्रता बेहद जरूरी है।