Edited By Ramanjot,Updated: 31 Mar, 2026 06:00 PM

साल 2025 के $5,600 के रिकॉर्ड स्तर से फिसलकर सोना मार्च 2026 में $4,100–$4,300 के स्तर पर आ गया है।
Gold Price Crash 2026: वैश्विक सराफा बाजार में बीते एक साल से जारी सोने की रिकॉर्ड तेजी पर अचानक ब्रेक लग गया है। साल 2025 में $5,600 प्रति औंस के ऐतिहासिक शिखर को छूने वाला सोना, 2026 की पहली तिमाही में निवेशकों को बड़ा झटका देते हुए अपने शीर्ष स्तर से 20 से 25% तक नीचे आ गया है। एक्सिस म्यूचुअल फंड के ताजा विश्लेषण के मुताबिक, मार्च 2026 तक सोने की कीमतें $4,100–$4,300 के दायरे में सिमट गई हैं।
ऐतिहासिक गिरावट: 40 साल का टूटा रिकॉर्ड
बाजार विशेषज्ञों के लिए सबसे चौंकाने वाली बात गिरावट की रफ्तार है। यह 1983 के बाद से देखी गई सबसे तेज साप्ताहिक गिरावट दर्ज की गई है। महज कुछ हफ्तों के भीतर निवेशकों की अरबों डॉलर की संपत्ति स्वाहा हो गई है, जिससे बाजार में अनिश्चितता का माहौल है।
गिरावट के 3 मुख्य कारण: क्यों सस्ता हुआ सोना?
बड़े पैमाने पर प्रॉफिट बुकिंग: जब सोना $5,600 के स्तर पर था, तब हेज फंड्स और बड़े रिटेल निवेशकों ने भारी मुनाफावसूली (Profit Booking) शुरू की, जिससे बाजार में लिक्विडिटी की कमी हो गई।
मजबूत डॉलर और फेडरल रिजर्व: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को हवा दी, जिससे वैश्विक महंगाई का डर बढ़ गया। इसके जवाब में अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने के संकेत दिए। उच्च ब्याज दरों के कारण डॉलर मजबूत हुआ, जिससे बिना ब्याज वाले सोने (Non-yielding asset) की मांग घट गई।
लिक्विडिटी क्रंच: सस्ते कर्ज का दौर खत्म होने और नकदी के प्रवाह में कमी आने से निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के बजाय डॉलर की ओर रुख किया है।
लंबी अवधि का आधार अभी भी मजबूत
शॉर्ट टर्म में भले ही सोना दबाव में दिख रहा हो, लेकिन जानकारों का मानना है कि इसका मूल आधार (Fundamentals) अभी भी सुरक्षित है। आरबीआई (RBI) समेत दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपनी डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए (De-dollarization) लगातार सोने की खरीदारी कर रहे हैं। यदि महंगाई के कारण वैश्विक मंदी जैसे हालात बनते हैं, तो निवेशक एक बार फिर सोने को 'सुरक्षित ठिकाने' (Safe Haven) के रूप में चुनेंगे।
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निवेशकों के लिए एक्सपर्ट सलाह
सावधानी से निवेश: केवल कीमतों में उछाल देखकर सारा पैसा एक साथ न लगाएं। पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी एक सीमित अनुपात (Asset Allocation) में ही रखें।
मैक्रो फैक्टर्स पर नजर: डॉलर इंडेक्स और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड की चाल पर नजर रखना जरूरी है, क्योंकि इनका सोने की कीमतों से उल्टा संबंध होता है।