Edited By Pardeep,Updated: 14 May, 2026 11:41 PM

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेट्रोल-डीजल बचाने और विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने की अपील के बाद अब सरकारी महकमों ने इसे अमली जामा पहनाना शुरू कर दिया है।
नेशनल डेस्कः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेट्रोल-डीजल बचाने और विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने की अपील के बाद अब सरकारी महकमों ने इसे अमली जामा पहनाना शुरू कर दिया है। इसी दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ऊर्जा मंत्रालय ने अपने कर्मचारियों के लिए कई क्रांतिकारी और अनूठी योजनाओं का ऐलान किया है, जिसमें नकद इनाम से लेकर घर से काम (Work From Home) तक शामिल है।
मंत्री ने पेश की मिसाल: अब ट्रेन और मेट्रो से करेंगे सफर
केंद्रीय ऊर्जा और शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल ने खुद आगे बढ़कर सादगी और बचत का उदाहरण पेश किया है। उन्होंने अपने आधिकारिक काफिले की गाड़ियों में भारी कटौती करते हुए अब केवल दो गाड़ियां ही साथ रखने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री के निर्देशों का पालन करते हुए उन्होंने नई ईवी (EV) खरीदने के बजाय मौजूदा बेड़े की ही इलेक्ट्रिक कार इस्तेमाल करने और दिल्ली से बाहर की यात्राएं ट्रेन से करने का संकल्प लिया है।
सप्ताह में 20% कर्मचारी करेंगे 'घर से काम'
ईंधन की खपत घटाने के लिए ऊर्जा मंत्रालय में सोमवार से एक नया रोस्टर लागू होने जा रहा है। इसके तहत सप्ताह के हर दिन 20 प्रतिशत कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम (WFH) करेंगे। हालांकि, यह नियम साइट पर काम करने वाले कर्मचारियों पर लागू नहीं होगा। साथ ही, मंत्रालय और उससे जुड़ी सरकारी कंपनियों के सभी अधिकारियों को अपनी निजी गाड़ियों के बजाय मेट्रो का अधिकतम उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।
माइलोमीटर की फोटो दिखाएगी 'कमाल', मिलेगा 2500 रुपये तक इनाम
मंत्रालय ने कर्मचारियों को कार कम चलाने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु एक दिलचस्प स्कीम शुरू की है। इसके तहत:
- कर्मचारियों को अपनी कार का विवरण ऑनलाइन पोर्टल पर रजिस्टर करना होगा।
- महीने की शुरुआत और अंत में माइलोमीटर की रीडिंग का फोटो अपलोड करना होगा।
- जिस कर्मचारी की कार सबसे कम चली होगी, उसे 500 रुपये से लेकर 2500 रुपये तक का नकद इनाम दिया जाएगा।
विदेशी मुद्रा भंडार बचाना है मुख्य लक्ष्य
मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इन सख्त और प्रोत्साहन आधारित कदमों का उद्देश्य लोगों को सार्वजनिक परिवहन के प्रति जागरूक करना है। सरकार का मानना है कि मौजूदा संकट के समय में ईंधन की खपत कम करना देश की अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती देने के लिए बेहद जरूरी है।