EC का बड़ा खुलासा- बंगाल में हुई रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग, 93.71% कुल वोटिंग में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से ज्यादा रही

Edited By Updated: 08 May, 2026 06:02 PM

bengal shatters records highest 93 71 voter turnout recorded in assembly polls

हाल ही में चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में संपन्न हुए विधानासभा चुनावों में मतदाताओं की भागीदारी बेहद अधिक रही और मतदान प्रतिशत के मामले में महिलाओं ने पुरुषों को पीछे छोड़ दिया। निर्वाचन आयोग ने यह जानकारी दी। निर्वाचन आयोग के मुताबिक...

नेशनल डेस्क: हाल ही में चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में संपन्न हुए विधानासभा चुनावों में मतदाताओं की भागीदारी बेहद अधिक रही और मतदान प्रतिशत के मामले में महिलाओं ने पुरुषों को पीछे छोड़ दिया। निर्वाचन आयोग ने यह जानकारी दी। निर्वाचन आयोग के मुताबिक पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक मतदान दर्ज किया गया। जिन 293 विधानसभा क्षेत्रों में मतगणना पूरी हो चुकी है, वहां 93.71 प्रतिशत मतदान हुआ। राज्य में डाक मतपत्रों सहित 6.38 करोड़ से अधिक वोट डाले गए, जबकि कुल मतदाताओं की संख्या 6.81 करोड़ से अधिक थी।

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में महिला मतदाताओं की भागीदारी 93.8 प्रतिशत रही, जो पुरुषों के 92.06 प्रतिशत मतदान से थोड़ी अधिक थी। हालांकि, पश्चिम बंगाल के आंकड़ों में फाल्टा विधानसभा क्षेत्र के मतदान आंकड़े शामिल नहीं हैं, क्योंकि वहां पुनर्मतदान होना है। आयोग के मुताबिक तमिलनाडु में 85.01 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। यहां 5.74 करोड़ मतदाताओं में से करीब 4.8 करोड़ मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। महिला का मतदान प्रतिशत 86.2 रहा, जबकि पुरुषों में यह 83.77 प्रतिशत था। असम में भी जबरदस्त मतदान हुआ और अंतिम मतदान प्रतिशत 85.74 तक पहुंच गया।

राज्य में 2.15 करोड़ से अधिक मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। महिला मतदाताओं में से 86.53 प्रतिशत ने मतदान किया, जो पुरुषों के 84.95 प्रतिशत से थोड़ा अधिक था। केरल में 78.11 प्रतिशत मतदान हुआ, जहां 2.12 करोड़ से अधिक वोट पड़े। यहां महिलाओं की भागीदारी 81.17 प्रतिशत रही, जबकि पुरुषों में यह 74.9 प्रतिशत थी। पुडुचेरी में 89.82 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। यहां भी महिला मतदाताओं की भागीदारी 91.39 प्रतिशत रहीं। इस केंद्र शासित प्रदेश में 8.5 लाख से अधिक वोट डाले गए। हालांकि, निर्वाचित उम्मीदवारों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अब भी सीमित रहा। तमिलनाडु में 234 सदस्यीय विधानसभा में 23 महिला विधायक चुनी गईं, जो कुल सदस्यों का 9.83 प्रतिशत है। पश्चिम बंगाल में 293 सदस्यीय विधानसभा में 37 महिलाएं निर्वाचित हुईं, जो 12.62 प्रतिशत है। वहीं केरल की 140 सदस्यीय विधानसभा में केवल 11 महिला विधायक चुनी गईं, जो 7.85 प्रतिशत है। चुनाव में केवल तृतीय लिंग के केवल दो उम्मीदवार मैदान में उतरे थे - एक तमिलनाडु से और एक केरल से। दोनों चुनाव हार गए और उनकी जमानत जब्त हो गई।

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चुनावों में व्यापक चुनावी ढांचे की भी झलक देखने को मिली। पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक 85,092 मतदान केंद्र बनाए गए, इसके बाद तमिलनाडु में 75,064 और असम में 31,490 मतदान केंद्र रहे। उम्मीदवारों की संख्या के लिहाज से तमिलनाडु में सबसे ज्यादा मुकाबला देखने को मिला। यहां 234 सीटों पर 4,023 उम्मीदवार मैदान में थे, यानी हर सीट पर औसतन 17 उम्मीदवार। एक सीट पर तो सबसे अधिक 79 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे थे।

पश्चिम बंगाल में 293 सीटों के लिए 2,920 उम्मीदवार मैदान में थे, जबकि केरल में सबसे कम उम्मीदवार रहे। वहां 140 सीटों के लिए 883 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा। आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि राज्यों में नोटा (उपरोक्त में से कोई नहीं) के वोट अपेक्षाकृत कम रहे। तमिलनाडु में सबसे कम 0.4 प्रतिशत वोट नोटा को मिले, जबकि असम में यह सबसे अधिक 1.23 प्रतिशत रहा। पश्चिम बंगाल में कुल पड़े वोटों में से 0.78 प्रतिशत मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना, जबकि पुडुचेरी में 0.77 प्रतिशत और केरल में 0.57 प्रतिशत मतदाताओं ने 'उपरोक्त में से कोई नहीं' विकल्प चुना।

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