Edited By Mehak,Updated: 07 Jan, 2026 06:02 PM

बिहार में मखाना को सुपरफूड के रूप में बढ़ावा देने के लिए सरकार ने किसानों के लिए विशेष अनुदान योजना शुरू की है। इसके तहत इच्छुक किसान 15 जनवरी तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। योजना में प्रति हेक्टेयर 0.97 लाख रुपये की लागत शामिल है, जिसमें बीज, कृषि...
नेशनल डेस्क : बिहार का मखाना अब दुनिया में एक सुपरफूड के रूप में पहचान बना रहा है। इसकी बढ़ती मांग को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारें मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। इसी क्रम में बिहार के कृषि विभाग ने मखाना की खेती के लिए एक विशेष सरकारी योजना शुरू की है, जिसमें किसानों को अनुदान के साथ आधुनिक तकनीक और उन्नत बीज उपलब्ध कराए जाएंगे।
ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया
इस योजना के तहत इच्छुक किसान 15 जनवरी तक बिहार कृषि ऐप या उद्यान निदेशालय की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। केवल वही किसान आवेदन कर सकते हैं, जो विभागीय पोर्टल DBT पर रजिस्टर्ड हैं।
योजना की मुख्य बातें
- मखाना की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर लागत 0.97 लाख रुपये रखी गई है, जिसमें बीज, कृषि इनपुट और हार्वेस्टिंग खर्च शामिल हैं।
- योजना के पहले साल में किसानों को प्रति हेक्टेयर 36,375 रुपये का अनुदान दिया जाएगा। बीज की राशि आपूर्तिकर्ता को सीधे दी जाएगी, जबकि बाकी राशि पौध रोपण के बाद किसानों को सीधे मिलेगी।
- योजना का लाभ लेने के लिए किसान न्यूनतम 0.25 एकड़ (0.1 हेक्टेयर) और अधिकतम 5 एकड़ (2 हेक्टेयर) क्षेत्र तक आवेदन कर सकते हैं।
बीज उत्पादन और वितरण
मखाना बीज उत्पादन योजना के तहत प्रदेश में उन्नत बीज “स्वर्ण वैदेही” और “सबौर मखाना-1” का उत्पादन किया जाएगा। बीज वितरण योजना के तहत चुने गए बीजों पर सरकार अधिकतम 225 रुपये प्रति किलो तक सहायता प्रदान करेगी। अगर बीज की कीमत इससे ज्यादा होगी, तो अतिरिक्त राशि किसानों को खुद देनी होगी।
कौन से जिलों में योजना लागू होगी
इस योजना का लाभ बिहार के 16 जिलों में मिलेगा। इनमें कटिहार, पूर्णिया, दरभंगा, मधुबनी, किशनगंज, सुपौल, अररिया, मधेपुरा, सहरसा, खगड़िया, समस्तीपुर, भागलपुर, सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण और मुजफ्फरपुर शामिल हैं।
कृषि और किसानों को लाभ
सरकार की इस पहल से मखाना की खेती का क्षेत्र बढ़ेगा और आधुनिक उपकरणों व उन्नत बीजों की मदद से उत्पादन में वृद्धि होगी। इसका सीधा फायदा किसानों की आमदनी बढ़ाने में होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इस योजना से बिहार का मखाना अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनेगा और राज्य के किसानों के लिए नए अवसर खुलेंगे।