अब गधे बनाएंगे करोड़पति! नौकरी छोड़िए और शुरू करें ये अनोखा बिजनेस, केंद्र सरकार दे रही 50 लाख की सब्सिडी

Edited By Updated: 04 Mar, 2026 04:59 PM

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केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) के तहत गधा पालन को बढ़ावा देने के लिए 50% सब्सिडी की योजना शुरू की है। इसके तहत स्वदेशी नस्ल के गधों के पालन के लिए अधिकतम 50 लाख रुपए तक की वित्तीय सहायता दी जा रही है।

नेशनल डेस्क: आमतौर पर बिजनेस का ख्याल आते ही लोगों के जेहन में रेस्तरां या फैक्ट्री जैसे विकल्प आते हैं, लेकिन अब पशुपालन क्षेत्र में एक अनोखा स्टार्टअप आपको करोड़पति बना सकता है। केंद्र सरकार ने गधों की घटती आबादी को बचाने और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय पशुधन मिशन (National Livestock Mission - NLM) के तहत एक बड़ी योजना शुरू की है। इस योजना के जरिए गधा पालन शुरू करने वाले उद्यमियों को सरकार 50 लाख रुपए तक की भारी-भरकम सब्सिडी मुहैया करा रही है। 

50% सब्सिडी: 1 करोड़ के प्रोजेक्ट पर 50 लाख की मदद 

राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) के तहत व्यक्ति, किसान उत्पादक संगठन (FPO), स्वयं सहायता समूह (SHG), संयुक्त देयता समूह (JLG) और धारा-8 कंपनियां आवेदन कर सकती हैं। योजना के मुताबिक, गधे, घोड़े या ऊंट पालन के प्रोजेक्ट की कुल लागत का 50 फीसदी हिस्सा सरकार सब्सिडी के तौर पर देगी। उदाहरण के लिए यदि आपके प्रोजेक्ट की कुल लागत 1 करोड़ रुपए है, तो सरकार आपको 50 लाख रुपये की कैपिटल सब्सिडी प्रदान करेगी। 

गधा पालन यूनिट के लिए विशेष नियम 

इस स्कीम का लाभ उठाने के लिए सरकार ने कुछ अनिवार्य शर्तें तय की हैं: 

यूनिट का आकार: एक यूनिट में कम से कम 50 मादा और 5 नर गधों का होना आवश्यक है। 

स्वदेशी नस्ल: यह लाभ केवल भारतीय मूल (स्वदेशी) की नस्लों पर ही देय है, विदेशी नस्लों पर नहीं। 

किस्तों में भुगतान: सब्सिडी दो चरणों में मिलती है। पहली किस्त बैंक लोन स्वीकृत होने पर और दूसरी किस्त प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद जारी की जाती है। 

क्यों पड़ी इस योजना की जरूरत? 

भारत में गधों की संख्या में आई भारी गिरावट सरकार के लिए चिंता का विषय है। 2019 की 20वीं पशुगणना के आंकड़ों के अनुसार, देश में अब मात्र 1.23 लाख गधे ही शेष बचे हैं। साल 2012 से अब तक इनकी आबादी में करीब 60 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। गधों के दूध और अन्य उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार इसे एक मुनाफे वाले बिजनेस मॉडल के रूप में प्रमोट कर रही है।
 

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