Edited By Rahul Singh,Updated: 27 Oct, 2026 07:28 PM

ब्रिक्स संसदीय मंच ने मंगलवार को आतंकवाद के सभी स्वरूपों और अभिव्यक्तियों की कड़े शब्दों में निंदा की और कहा कि इससे निपटने के लिए ''कतई बर्दाश्त नहीं'' की नीति अपनाने और इस मुद्दे पर दोहरे मानदंडों को खारिज करने की जरूरत है।
नई दिल्ली । ब्रिक्स संसदीय मंच ने मंगलवार को आतंकवाद के सभी स्वरूपों और अभिव्यक्तियों की कड़े शब्दों में निंदा की और कहा कि इससे निपटने के लिए ''कतई बर्दाश्त नहीं'' की नीति अपनाने और इस मुद्दे पर दोहरे मानदंडों को खारिज करने की जरूरत है। संविधान सदन में 26 और 27 अक्टूबर को आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के समापन पर पारित संयुक्त घोषणा पत्र में सदस्य देशों ने सीमा पार आतंकवादियों की आवाजाही, आतंकवाद के वित्तपोषण और आतंकवादियों को सुरक्षित पनाहगाह उपलब्ध कराने सहित आतंकवाद के सभी स्वरूपों से मुकाबला करने की प्रतिबद्धता दोहराई। घोषणा पत्र में कहा गया, ''हम आतंकवाद के सभी कृत्यों की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं, क्योंकि वे आपराधिक और अनुचित हैं, चाहे उनका उद्देश्य कुछ भी हो और वे कहीं भी, कभी भी तथा किसी के द्वारा भी किए गए हों।''
आतंकवाद को किसी धर्म से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए
मंच ने 22 अप्रैल, 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की ''कड़े से कड़े शब्दों में'' निंदा की। इस हमले में 26 लोग मारे गए थे और कई अन्य घायल हुए थे। ब्रिक्स देशों की संसदों के पीठासीन अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने कहा कि आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। आतंकवादी गतिविधियों में शामिल लोगों और उनका समर्थन करने वालों को जवाबदेह ठहराने तथा संबंधित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत न्याय के कटघरे में लाने पर भी जोर दिया गया। संयुक्त घोषणा पत्र में कहा गया, ''हम आतंकवाद को कतई बर्दाश्त न करने की नीति अपनाने का आह्वान करते हैं और आतंकवाद का मुकाबला करने में दोहरे मानदंडों को अस्वीकार करते हैं।'' मंच ने संयुक्त राष्ट्र के ढांचे के तहत अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक समझौते को जल्द अंतिम रूप देने और उसे अंगीकार करने की मांग की। साथ ही संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित सभी आतंकवादियों और आतंकवादी संगठनों के खिलाफ समन्वित एवं ठोस कार्रवाई का आह्वान किया गया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ बनी सहमति सदस्य और भागीदार देशों के साझा संकल्प को दर्शाती है।
विश्व की समस्याओं का स्थायी समाधान संवाद में है
उन्होंने कहा, ''हमने इस मंच से आतंकवाद के सभी कृत्यों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित सभी आतंकवादियों और आतंकवादी संगठनों के विरुद्ध समन्वित और ठोस कार्रवाई करने का भी आह्वान किया है।'' बिरला ने संयुक्त घोषणा पत्र पर सहमति को सदस्य और भागीदार देशों की साझा सोच तथा सहयोग की भावना का महत्वपूर्ण प्रतीक बताया। विश्व के विभिन्न हिस्सों में संघर्ष, अस्थिरता और आर्थिक अनिश्चितताओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में संवाद, विश्वास और सहयोग का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। बिरला ने कहा, ''भारत का यह विश्वास रहा है कि विश्व की समस्याओं का स्थायी समाधान संघर्ष में नहीं, संवाद में है, युद्ध में नहीं, शांति में है और प्रतिस्पर्धा से अधिक सहयोग में है।'' उन्होंने कहा कि सभी देशों को ऐसे विश्व के निर्माण के लिए मिलकर काम करना चाहिए, जहां प्रत्येक राष्ट्र की संप्रभुता का सम्मान हो, अंतरराष्ट्रीय विवादों का शांतिपूर्ण समाधान हो और विकास के अवसर सभी को समान रूप से उपलब्ध हों। घोषणा पत्र में संयुक्त राष्ट्र चार्टर में निहित संप्रभु समानता, परस्पर सम्मान, देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करने और अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई गई। ब्रिक्स संसदीय मंच ने सुरक्षा परिषद सहित संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधार का समर्थन करते हुए वैश्विक संस्था को अधिक न्यायसंगत, लोकतांत्रिक, समावेशी, प्रभावी और दक्ष बनाने पर जोर दिया।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए मंच ने सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और ऐसी किसी कार्रवाई से बचने का आग्रह किया जिससे हालात और बिगड़ सकते हैं। इजराइल-फलस्तीन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र के प्रासंगिक प्रस्तावों के अनुरूप द्वि-राष्ट्र समाधान के प्रति भी समर्थन दोहराया गया। घोषणा पत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी की परिवर्तनकारी क्षमता को स्वीकार करते हुए इनके सुरक्षित, समावेशी और विश्वसनीय विकास तथा इस्तेमाल की जरूरत पर जोर दिया गया। बिरला ने कहा कि एआई का इस्तेमाल नैतिकता, पारदर्शिता, जवाबदेही और मानव कल्याण के सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से 'ग्लोबल साउथ' की आकांक्षाओं को वैश्विक निर्णय प्रक्रियाओं में उचित स्थान देने की जरूरत रेखांकित की। ''जन-केंद्रित विकास हेतु संसदों का सुदृढ़ीकरण'' विषय पर आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात की संसदों के पीठासीन अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया। मंच ने सतत विकास के लिए 2030 एजेंडा के प्रति प्रतिबद्धता दोहराने के साथ जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करने की आवश्यकता भी रेखांकित की। बिरला ने वर्ष 2027 के लिए ब्रिक्स की अध्यक्षता ग्रहण करने वाले चीन को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि नयी दिल्ली से यह संदेश जाना चाहिए कि संवाद निरंतर रहे, विश्वास और मजबूत हो तथा सहयोग ठोस परिणामों में बदले।