अंकिता भंडारी हत्याकांड: रिजॉर्ट से लापता होने से लेकर उम्रकैद और VIP विवाद तक, जानिए कब क्या हुआ

Edited By Updated: 15 Oct, 2026 06:02 PM

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मई 2025 में कोटद्वार की अदालत ने तीनों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। हालांकि, दिसंबर 2025 में सोशल मीडिया पर सामने आए ऑडियो और वीडियो के बाद कथित VIP की भूमिका को लेकर नए सवाल उठने लगे।

देहरादून: उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में तीन आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है, लेकिन मामले से जुड़ा कथित VIP विवाद एक बार फिर चर्चा में है। सितंबर 2022 में ऋषिकेश के पास वनंत्रा रिजॉर्ट में काम करने वाली 19 वर्षीय अंकिता भंडारी अचानक लापता हो गई थीं। छह दिन बाद उनका शव चीला नहर से बरामद हुआ। जांच में रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों के नाम सामने आए। मई 2025 में कोटद्वार की अदालत ने तीनों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। हालांकि, दिसंबर 2025 में सोशल मीडिया पर सामने आए ऑडियो और वीडियो के बाद कथित VIP की भूमिका को लेकर नए सवाल उठने लगे। अंकिता के परिवार ने इस पहलू की जांच की मांग की। आइए, इस पूरे मामले की शुरुआत से अब तक की प्रमुख घटनाओं और कानूनी कार्रवाई को विस्तार से समझते हैं।

2022: कब और कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?
अगस्त 2022: वनंत्रा रिजॉर्ट में नौकरी शुरू की

अंकिता भंडारी उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के यमकेश्वर क्षेत्र में स्थित वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं। उन्होंने अगस्त 2022 में यहां नौकरी शुरू की थी। रिजॉर्ट का संचालन पुलकित आर्य करता था, जो तत्कालीन भाजपा नेता विनोद आर्य का बेटा है।

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18 सितंबर 2022: अचानक लापता हुईं अंकिता

18 सितंबर 2022 की रात अंकिता रिजॉर्ट से लापता हो गईं। बाद में सामने आए गवाहों के बयानों और जांच में इस रात की घटनाओं को मामले की अहम कड़ी माना गया। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, अंकिता और पुलकित आर्य के बीच विवाद हुआ था और इसके बाद उन्हें चीला नहर में धकेल दिया गया।

19-21 सितंबर 2022: गुमशुदगी और शुरुआती पुलिस कार्रवाई पर सवाल
अंकिता के लापता होने के बाद उनके परिवार ने उनकी तलाश शुरू की और पुलिस से संपर्क किया। शुरुआती कार्रवाई राजस्व पुलिस के अधिकार क्षेत्र में हुई। इस दौरान मामला दर्ज करने और समय पर कार्रवाई को लेकर सवाल उठे। बाद में जांच में सामने आया कि संबंधित राजस्व अधिकारी को मामले की जानकारी दी गई थी, लेकिन शुरुआत में नियमित तरीके से FIR दर्ज नहीं हुई। इस देरी को लेकर पुलिस व्यवस्था की आलोचना हुई और संबंधित अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई की गई।

22 सितंबर 2022: मामला नियमित पुलिस को सौंपा गया
लगातार बढ़ते दबाव के बीच अंकिता का मामला नियमित पुलिस को सौंप दिया गया। इसके बाद हत्या समेत अन्य संभावित अपराधों की जांच शुरू हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने विशेष जांच दल यानी SIT गठित किया। इसकी अगुवाई डीआईजी पी. रेणुका देवी ने की।

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23 सितंबर 2022: तीनों आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने 23 सितंबर को पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया। पुलकित रिजॉर्ट का संचालक था, जबकि सौरभ और अंकित वहां कर्मचारी थे। मामले में सामने आए आरोपों के मुताबिक, अंकिता पर एक कथित VIP अतिथि को विशेष सेवाएं देने का दबाव बनाया जा रहा था। अंकिता के विरोध और आरोपियों के साथ विवाद को अभियोजन पक्ष ने हत्या की घटना से जोड़ा। हालांकि, कथित VIP की पहचान और भूमिका इस मामले में अलग विवाद का विषय बनी रही।

23-24 सितंबर 2022 की रात: वनंत्रा रिजॉर्ट पर बुलडोजर कार्रवाई
तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद प्रशासन ने वनंत्रा रिजॉर्ट के कुछ हिस्सों को ध्वस्त करना शुरू कर दिया। यह कार्रवाई रात में हुई और बाद में इसे लेकर गंभीर सवाल उठे। अंकिता के परिवार ने आशंका जताई कि रिजॉर्ट तोड़े जाने से महत्वपूर्ण सबूत नष्ट हो सकते हैं। दूसरी ओर, पुलिस की ओर से कहा गया कि ध्वस्तीकरण से पहले परिसर की वीडियोग्राफी की गई थी और जांच टीम ने जरूरी साक्ष्य सुरक्षित किए थे। रिजॉर्ट पर बुलडोजर कार्रवाई इस मामले के सबसे विवादित पहलुओं में से एक बन गई।

24 सितंबर 2022: चीला नहर से मिला अंकिता का शव
लगातार तलाश के बाद अंकिता का शव ऋषिकेश के पास चीला नहर से बरामद हुआ। SDRF की मदद से शव निकाला गया और पोस्टमॉर्टम कराया गया। शुरुआती पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण डूबना बताया गया। शव मिलने के बाद उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। लोगों ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, निष्पक्ष जांच और अंकिता के परिवार को न्याय देने की मांग की।

24-25 सितंबर 2022: राजनीतिक कार्रवाई और अंतिम संस्कार
मामले में राजनीतिक विवाद बढ़ने के बाद भाजपा ने विनोद आर्य और उनके बेटे अंकित आर्य को पार्टी से निष्कासित कर दिया। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इस मामले के मुख्य आरोपी पुलकित आर्य है, जबकि विनोद आर्य उसका पिता है। 25 सितंबर के आसपास अंकिता का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान भी परिवार की ओर से जांच और कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए।

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दिसंबर 2022: SIT ने दाखिल की 500 पन्नों की चार्जशीट

SIT ने जांच पूरी करने के बाद दिसंबर 2022 में कोटद्वार की अदालत में करीब 500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। इसमें पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को आरोपी बनाया गया। जांच में गवाहों के बयान, डिजिटल साक्ष्य, कॉल डिटेल और घटनाक्रम से जुड़े अन्य सबूत शामिल किए गए। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ हत्या और साजिश समेत विभिन्न धाराओं में मामला आगे बढ़ाया। इसी दौरान कथित VIP अतिथि को लेकर भी चर्चा तेज हुई। जांच से जुड़े मीडिया रिपोर्टों में कहा गया कि अंकिता ने अपने परिचितों को VIP अतिथि को विशेष सेवाएं देने के दबाव के बारे में बताया था। हालांकि, किसी कथित VIP का नाम सामने आना और अदालत में उसकी संलिप्तता साबित होना दो अलग बातें हैं।

2023: अदालत में सुनवाई और आरोप तय
30 जनवरी 2023: ट्रायल की शुरुआत
कोटद्वार की अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत में मामले की सुनवाई शुरू हुई। अदालत में आरोपियों के खिलाफ पेश साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की दलीलों पर विचार किया जाने लगा।

मार्च 2023: आरोप तय होने के बाद गवाही शुरू
अदालत में आरोप तय होने के बाद अभियोजन पक्ष की गवाही की प्रक्रिया आगे बढ़ी। 28 मार्च 2023 से अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयान दर्ज किए जाने लगे। मामले में रिजॉर्ट से जुड़े लोगों, जांच अधिकारियों और अन्य गवाहों के बयान महत्वपूर्ण रहे। अभियोजन पक्ष ने घटनाओं की कड़ियों को जोड़ने के लिए परिस्थितिजन्य साक्ष्य और डिजिटल रिकॉर्ड का सहारा लिया।

20-21 दिसंबर 2023: पुलकित आर्य की जमानत याचिका खारिज
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मुख्य आरोपी पुलकित आर्य की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने मामले की गंभीरता और निचली अदालत में सामने आए साक्ष्यों को ध्यान में रखा। इस फैसले के बाद भी मामले की सुनवाई जारी रही और आरोपियों के खिलाफ मुकदमा अदालत में चलता रहा।

2024: मुकदमे में गवाहियों और साक्ष्यों पर सुनवाई जारी
2024 में अदालत में मामले की सुनवाई जारी रही। अभियोजन पक्ष ने गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य पेश किए, जबकि बचाव पक्ष ने अपना पक्ष रखा। इस मुकदमे में गवाहियों, घटनाक्रम के समय, आरोपियों की मौजूदगी और डिजिटल साक्ष्यों की अहम भूमिका रही। अदालत को यह तय करना था कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए सबूत आरोपियों के अपराध को संदेह से परे साबित करते हैं या नहीं। अंकिता का परिवार इस दौरान भी न्याय और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करता रहा।

30 मई 2025: तीनों आरोपियों को उम्रकैद
करीब ढाई साल तक चली सुनवाई के बाद 30 मई 2025 को कोटद्वार की अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराया। अदालत ने पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को उम्रकैद की सजा सुनाई। तीनों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। अभियोजन पक्ष ने मुकदमे के दौरान 47 गवाहों के बयान पेश किए। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहियों पर विचार करने के बाद फैसला सुनाया। इस फैसले के साथ अंकिता की हत्या के मामले में तीनों आरोपियों की आपराधिक जिम्मेदारी पर निचली अदालत का निर्णय सामने आया। हालांकि, कथित VIP की भूमिका को लेकर उठे सवाल इस फैसले से अलग चर्चा का विषय बने रहे।

दिसंबर 2025: उर्मिला सनावर के वीडियो और ऑडियो से फिर उठा VIP विवाद
दिसंबर 2025 के आखिरी सप्ताह में अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने सोशल मीडिया पर वीडियो और कथित बातचीत से जुड़े ऑडियो साझा किए। उन्होंने दावा किया कि उनके पास अंकिता भंडारी मामले में कथित VIP की पहचान से जुड़े सबूत हैं। इन वीडियो और ऑडियो के सामने आने के बाद उत्तराखंड में राजनीतिक हलचल तेज हो गई। सोशल मीडिया पर अलग-अलग नामों को लेकर चर्चाएं होने लगीं और मामले की दोबारा जांच की मांग उठने लगी। कुछ लोगों ने इन रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए और इन्हें फर्जी या AI से तैयार बताया। इसलिए इन रिकॉर्डिंग में किए गए दावों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्यों के रूप में पेश करना उचित नहीं है। यह विवाद इस वजह से भी महत्वपूर्ण बना क्योंकि तीनों आरोपियों को हत्या के मामले में सजा मिल चुकी थी, लेकिन कथित VIP की भूमिका को लेकर परिवार और अन्य लोगों के सवाल पूरी तरह समाप्त नहीं हुए थे।

2026: परिवार की मांग और जांच को लेकर सवाल
2026 में भी अंकिता के परिवार की ओर से कथित VIP पहलू की निष्पक्ष जांच की मांग उठती रही। इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और विरोध प्रदर्शन भी हुए। परिवार का कहना रहा कि हत्या के मामले में सजा मिलने के बावजूद सभी सवालों का जवाब मिलना जरूरी है।

अंकिता भंडारी के माता-पिता इंडिया गेट पर क्यों बैठे धरने पर?
अंकिता भंडारी के माता-पिता दिल्ली के इंडिया गेट पर न्याय की मांग को लेकर धरने पर बैठे। अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी ने धरने की वजह बताते हुए कहा कि उनकी बेटी की हत्या के मामले में सीबीआई जांच चल रही है। ऐसे में जांच पूरी होने से पहले ही हत्याकांड से जुड़े कथित VIP को राज्यपाल पद पर नियुक्त किए जाने की खबर से परिवार चिंतित है। अंकिता के परिजनों की मांग है कि मामले की जांच पूरी होने तक कथित VIP की नियुक्ति पर रोक लगाई जाए। उनके पिता ने कहा कि वे अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए देश की राजधानी दिल्ली पहुंचे हैं और उन्होंने राष्ट्रपति से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है।


 

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