BJP National President Election: सांसद-मंत्री ही नहीं, आप भी लड़ सकते हैं BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव? बस इन शर्तों को करना होगा पूरा

Edited By Updated: 16 Jan, 2026 02:22 PM

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BJP में 'संगठन पर्व 2024' के तहत नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की सरगर्मी तेज है। 19 और 20 जनवरी को होने वाली इस प्रक्रिया के बीच अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि क्या कोई साधारण कार्यकर्ता इस पद के लिए पर्चा भर सकता है? बीजेपी का संविधान कहता है...

BJP National President Election: BJP में 'संगठन पर्व 2024' के तहत नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की सरगर्मी तेज है। 19 और 20 जनवरी को होने वाली इस प्रक्रिया के बीच अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि क्या कोई साधारण कार्यकर्ता इस पद के लिए पर्चा भर सकता है? बीजेपी का संविधान कहता है 'हाँ', लेकिन हकीकत की राह इतनी आसान नहीं है।

पात्रता की अग्निपरीक्षा: 15 साल का तप और सक्रियता बीजेपी के संविधान की धारा-19 के मुताबिक अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनने के लिए केवल पार्टी का सदस्य होना काफी नहीं है। इसके लिए दो प्रमुख शर्तें हैं:

  1. 15 साल की प्राथमिक सदस्यता: उम्मीदवार कम से कम डेढ़ दशक से पार्टी से जुड़ा होना चाहिए।
  2. सक्रिय सदस्यता की 4 अवधियाँ: उसने सक्रिय सदस्य (Active Member) के रूप में कम से कम चार संगठनात्मक कार्यकाल पूरे किए हों।

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नामांकन का चक्रव्यूह

 सिर्फ फॉर्म भर देने से चुनाव नहीं लड़ा जा सकता। बीजेपी की चुनाव प्रणाली 'सामूहिक सहमति' पर टिकी है। उम्मीदवार को भाजपा के निर्वाचक मंडल (Electoral College) के कम से कम 20 सदस्यों द्वारा प्रस्तावित किया जाना अनिवार्य है। दिलचस्प बात यह है कि ये 20 प्रस्तावक किसी एक क्षेत्र के नहीं हो सकते। उन्हें कम से कम 5 अलग-अलग राज्यों से होना चाहिए, जहाँ सांगठनिक चुनाव पहले ही संपन्न हो चुके हों।

वोट कौन देता है?

बीजेपी अध्यक्ष का चुनाव आम जनता या सभी पार्टी सदस्य नहीं करते। इसके लिए एक खास 'निर्वाचक मंडल' होता है जिसमें राष्ट्रीय परिषद और प्रदेश परिषदों के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं। पार्टी नियम के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव से पहले कम से कम 50% राज्यों में प्रदेश अध्यक्षों का चुनाव पूरा होना अनिवार्य है।

कार्यकाल की सीमा

पार्टी के नियमों के तहत एक अध्यक्ष का कार्यकाल 3 वर्ष का होता है। कोई भी व्यक्ति लगातार दो बार (यानी कुल 6 साल) से ज्यादा इस पद पर नहीं रह सकता। 2012 में हुए संविधान संशोधन के बाद यह दो कार्यकाल की व्यवस्था की गई थी।

 

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