Edited By Tanuja,Updated: 22 Jun, 2026 04:47 PM

कनाडा में चरमपंथी विचारधाराओं और नफरत फैलाने वाले अभियानों पर शिकंजा कसने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। प्रस्तावित कानून के तहत आतंकवादी संगठनों से जुड़े प्रतीकों और चरमपंथ के महिमामंडन पर रोक लगाने की तैयारी है। इस कदम का उद्देश्य सामाजिक...
International Desk: कनाडा सरकार ने चरमपंथी विचारधाराओं और नफरत फैलाने वाले अभियानों के खिलाफ अपनी नीति को और कड़ा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस पहल को कई इंडो-कैनेडियन समुदायों ने लंबे समय से लंबित कार्रवाई बताते हुए स्वागत किया है। प्रस्तावित कानून के तहत ऐसे संगठनों से जुड़े प्रतीकों के सार्वजनिक प्रदर्शन को अपराध की श्रेणी में लाने की बात कही गई है, जिन्हें आतंकवादी गतिविधियों से जोड़ा गया है। इसके अलावा धार्मिक, सांस्कृतिक और सामुदायिक संस्थानों को निशाना बनाने वाली डराने-धमकाने की गतिविधियों पर भी कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
कनाडा की संसद के निचले सदन में पेश किए गए इस विधेयक का उद्देश्य उन गतिविधियों पर रोक लगाना है जो लोकतांत्रिक स्वतंत्रताओं का दुरुपयोग कर समाज में भय, विभाजन और कट्टरपंथी सोच को बढ़ावा देती हैं। समर्थकों का कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ हिंसा, घृणा या आतंकवाद से जुड़े व्यक्तियों और संगठनों का महिमामंडन नहीं हो सकता। कई वर्षों से इंडो-कैनेडियन समुदाय के सदस्य इस बात को लेकर चिंता जताते रहे हैं कि कुछ सार्वजनिक कार्यक्रमों और प्रदर्शनों में ऐसे प्रतीकों तथा नारों का इस्तेमाल किया जाता है जो हिंसक गतिविधियों या चरमपंथी विचारधाराओं से जुड़े माने जाते हैं। उनका कहना है कि इससे समाज में तनाव और असुरक्षा की भावना पैदा होती है।
प्रस्तावित प्रावधानों के तहत कानून प्रवर्तन एजेंसियों को ऐसे मामलों में अधिक अधिकार मिल सकते हैं, जहां चरमपंथी प्रचार को सामाजिक या राजनीतिक सक्रियता के नाम पर बढ़ावा दिया जाता है। सरकार का तर्क है कि लोकतांत्रिक अधिकारों और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह कानून अंतिम रूप से पारित हो जाता है तो यह कनाडा में चरमपंथी नेटवर्क, नफरत फैलाने वाले अभियानों और सामाजिक विभाजन को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। कनाडा सरकार का संदेश स्पष्ट माना जा रहा है कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की जाएगी, लेकिन उनका इस्तेमाल हिंसा, डर और कट्टरपंथ को बढ़ावा देने के लिए नहीं होने दिया जाएगा।