Edited By Tanuja,Updated: 22 Jun, 2026 07:29 PM

कनाडा के ब्रैम्पटन में आयोजित एक नगर कीर्तन के दौरान बच्चों को कथित तौर पर ‘शहीद’ के रूप में प्रदर्शित किए जाने और खालिस्तानी प्रतीकों के इस्तेमाल को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस घटना ने खालिस्तान समर्थक गतिविधियों, प्रवासी राजनीति और भारत-कनाडा...
International Desk: कनाडा के ब्रैम्पटन शहर में आयोजित एक नगर कीर्तन कार्यक्रम के दौरान खालिस्तानी प्रतीकों और अलगाववादी संदेशों के कथित प्रदर्शन को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और तस्वीरों ने इस आयोजन को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, जुलूस में कुछ बच्चों को कथित रूप से ‘शहीदों’ के रूप में प्रस्तुत किया गया था। कार्यक्रम में खालिस्तानी झंडे और अलगाववादी विचारधारा से जुड़े प्रतीक भी दिखाई दिए, जिसके बाद ऑनलाइन मंचों पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब कनाडा और भारत पिछले कुछ वर्षों के तनावपूर्ण दौर के बाद अपने संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच रिश्तों में तनाव उस समय बढ़ा था जब खालिस्तानी अलगाववादी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर गंभीर राजनयिक विवाद पैदा हुआ था। अब जबकि कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्विपक्षीय संबंधों में सुधार और संवाद को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, ब्रैम्पटन की यह घटना फिर से उन सवालों को सामने ले आई है जो सार्वजनिक आयोजनों में चरमपंथी या अलगाववादी संदेशों की मौजूदगी से जुड़े हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल कनाडा के भीतर सामाजिक और राजनीतिक बहस को प्रभावित करती हैं, बल्कि भारत-कनाडा संबंधों पर भी असर डाल सकती हैं। आलोचकों का कहना है कि सार्वजनिक मंचों पर अलगाववादी विचारधाराओं के प्रदर्शन की निगरानी और उनके प्रभाव पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता है, जबकि दूसरी ओर कुछ समुदाय इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे का मुद्दा बताते हैं। फिलहाल यह घटना कनाडा में खालिस्तानी गतिविधियों, प्रवासी राजनीति, सार्वजनिक सुरक्षा और दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों पर नई बहस का कारण बन गई है।