Edited By Parveen Kumar,Updated: 22 Jun, 2026 06:51 PM

चिकित्सा के स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए रविवार को दोबारा आयोजित राष्ट्रीय पात्रता व प्रवेश परीक्षा (नीट) में जयपुर के एक केंद्र में कथित तौर पर मोबाइल फोन से नकल करते पकड़ी गई 22 वर्षीय छात्रा को अदालत ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।...
नेशनल डेस्क : चिकित्सा के स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए रविवार को दोबारा आयोजित राष्ट्रीय पात्रता व प्रवेश परीक्षा (नीट) में जयपुर के एक केंद्र में कथित तौर पर मोबाइल फोन से नकल करते पकड़ी गई 22 वर्षीय छात्रा को अदालत ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस ने सोमवार को यह जानकारी दी।
पुलिस ने बताया कि छात्रा की पहचान प्रेम नगर, गुर्जर की थड़ी निवासी हिमांशी तिवाड़ी के रूप में हुई है। उसे रविवार को परीक्षा केंद्र पर पकड़े जाने के बाद सोमवार को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। घटना बिंदायका क्षेत्र के एक परीक्षा केंद्र की है, जहां छात्रा को परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन का उपयोग करते पाया गया। पर्यवेक्षकों को उसकी गतिविधियों पर संदेह हुआ और तलाशी लेने पर मोबाइल फोन उसके कपड़ों के भीतर छिपा हुआ मिला।
पुलिस के अनुसार, परीक्षा हॉल में मौजूद शिक्षकों को छात्रा की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। जांच करने पर उसके पास मोबाइल मिला। पूछताछ में सामने आया कि छात्रा ने मोबाइल को शर्ट के बटन के नीचे अंडरगारमेंट्स में छुपाकर रखा था, ताकि सुरक्षा जांच से बचा जा सके। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि छात्रा ने पुलिस को बताया कि वह परीक्षा के दौरान AI की मदद से सवालों के जवाब खोजने के इरादे से मोबाइल लेकर आई थी। हालांकि परीक्षा केंद्र के आसपास सक्रिय जैमर उसकी योजना पर भारी पड़ गए। प्रारंभिक जांच में मोबाइल से NEET प्रश्नपत्र की तस्वीरें भी मिलने की बात सामने आई है, लेकिन जैमर के कारण वे तस्वीरें बाहर नहीं भेजी जा सकीं।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि प्रवेश के समय मेटल डिटेक्टर ने दो बार अलर्ट दिया था, लेकिन छात्रा ने सुरक्षाकर्मियों को गुमराह कर दिया और उसे प्रवेश मिल गया। अधिकारी परीक्षा केंद्र के अधीक्षक और परीक्षा पर्यवेक्षकों से भी पूछताछ कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि सुरक्षा जांच के बावजूद मोबाइल फोन अंदर कैसे ले जाया गया। पुलिस ने कहा कि आगे की कार्रवाई फॉरेंसिक रिपोर्ट पर निर्भर करेगी। यदि कदाचार साबित होता है तो छात्रा को संबंधित प्रावधानों के तहत पांच साल तक की सजा और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।