शिक्षकों के लिए अनिवार्य OSM ट्रेनिंग शुरू, OASIS लॉगिन से करनी होगी प्रैक्टिस

Edited By Updated: 14 Feb, 2026 09:34 PM

cbse on screen marking

Central Board of Secondary Education (CBSE) ने बोर्ड परीक्षा 2026 को अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है।

नेशनल डेस्क: Central Board of Secondary Education (CBSE) ने बोर्ड परीक्षा 2026 को अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। बोर्ड ने सभी संबद्ध स्कूलों को निर्देश दिया है कि कक्षा 11 और 12 के शिक्षकों को ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली की अनिवार्य ट्रेनिंग पूरी करनी होगी। यह पहल 2026 की कक्षा 12 बोर्ड परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन के लिए की जा रही है।

क्या है ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM)?

ऑन-स्क्रीन मार्किंग एक डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया है, जिसमें परीक्षा के बाद उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जाएगा। शिक्षक इन्हें कंप्यूटर स्क्रीन पर देखकर अंक देंगे।

इस नई प्रणाली से अंकों की गणना स्वतः होगी, जिससे जोड़-घटाव की गलतियां नहीं होंगी। परिणाम प्रक्रिया तेज होगी,देश-विदेश के सभी CBSE स्कूलों के शिक्षक मूल्यांकन में भाग ले सकेंगे। परिवहन और लॉजिस्टिक खर्च में कमी आएगी। पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, कक्षा 10 की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच फिलहाल पारंपरिक तरीके से ही की जाएगी।

स्कूलों और शिक्षकों के लिए निर्देश

CBSE ने स्पष्ट किया है कि स्कूल प्रिंसिपल OASIS पोर्टल पर शिक्षकों का डेटा अपडेट कराएं। डेटा सत्यापन के बाद शिक्षकों को लॉगिन आईडी और पासवर्ड प्रदान किए जाएंगे। शिक्षक स्कूल की कंप्यूटर लैब से लॉगिन कर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रैक्टिस करेंगे।

यह अभ्यास 16 फरवरी 2026 से लगभग एक सप्ताह तक उपलब्ध रहेगा। बोर्ड ने एक विशेष डैशबोर्ड भी उपलब्ध कराया है, जिसके जरिए प्रिंसिपल यह देख सकेंगे कि कितने शिक्षकों ने ट्रेनिंग पूरी कर ली है और कितने लंबित हैं।

बोर्ड परीक्षा 2026 के अहम आंकड़े

बोर्ड के वेबिनार में साझा जानकारी के अनुसार लगभग 18.59 लाख छात्र कक्षा 12 की परीक्षा देंगे। 120 विषयों की परीक्षा आयोजित होगी। करीब 1 करोड़ से अधिक उत्तर पुस्तिकाओं का डिजिटल मूल्यांकन किया जाएगा। CBSE ने यह भी स्पष्ट किया है कि मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी तरह शिक्षकों द्वारा ही की जाएगी, किसी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम द्वारा नहीं। स्कूलों को कंप्यूटर, इंटरनेट और तकनीकी संसाधनों की पर्याप्त तैयारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

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