Edited By Ramanjot,Updated: 17 Feb, 2026 07:38 PM

राजधानी दिल्ली में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। Municipal Corporation of Delhi (MCD) ने अपने अधीन संचालित श्मशान घाटों पर CNG और इलेक्ट्रिक माध्यम से होने वाले दाह संस्कार को निशुल्क करने का फैसला लिया है।
नेशनल डेस्क: राजधानी दिल्ली में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। Municipal Corporation of Delhi (MCD) ने अपने अधीन संचालित श्मशान घाटों पर CNG और इलेक्ट्रिक माध्यम से होने वाले दाह संस्कार को निशुल्क करने का फैसला लिया है। यह प्रस्ताव हाल ही में हुई हाउस मीटिंग में रखा गया और बहुमत से मंजूर कर लिया गया।
इस योजना को शुरुआती तौर पर दो साल के पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जा रहा है। मुख्य उद्देश्य पारंपरिक लकड़ी आधारित दाह संस्कार से निकलने वाले धुएं को कम करना और दिल्ली की बिगड़ती वायु गुणवत्ता पर नियंत्रण पाना है।
कितने श्मशान घाट MCD के अधीन?
MCD राजधानी में कुल 39 श्मशान घाटों और विभिन्न कब्रिस्तानों का प्रबंधन करती है। इनमें से अधिकांश स्थान सामाजिक संस्थाओं, ट्रस्टों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (RWA) द्वारा ‘नो लॉस, नो प्रॉफिट’ मॉडल पर संचालित होते हैं। अब जिन घाटों पर CNG और इलेक्ट्रिक दाह संस्कार की सुविधा उपलब्ध है, वहां किसी भी प्रकार का यूजर चार्ज नहीं लिया जाएगा।
क्यों लिया गया यह फैसला?
लकड़ी से होने वाले पारंपरिक दाह संस्कार में बड़ी मात्रा में धुआं और कार्बन उत्सर्जन होता है, जो पहले से प्रदूषित दिल्ली की हवा को और खराब करता है। अधिकारियों का मानना है कि आर्थिक राहत देकर लोगों को वैकल्पिक और स्वच्छ विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित किया जा सकता है। CNG और इलेक्ट्रिक तकनीक न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि समय और संसाधनों की भी बचत करती है।
खर्च में कितना अंतर?
- अब तक अनुमानित खर्च इस प्रकार था:
- लकड़ी आधारित दाह संस्कार: लगभग ₹6000
- CNG आधारित दाह संस्कार: करीब ₹1500
- इलेक्ट्रिक दाह संस्कार: लगभग ₹500
नए निर्णय के बाद CNG और इलेक्ट्रिक विकल्प पूरी तरह मुफ्त होंगे, जिससे परिवारों पर आर्थिक बोझ भी कम होगा।
पायलट प्रोजेक्ट: क्या होंगी चुनौतियां?
आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्षों में दिल्ली में कुल दाह संस्कारों में से केवल 8-9% ही CNG या इलेक्ट्रिक माध्यम से हुए। यदि मुफ्त सुविधा के बाद यह आंकड़ा 25% तक पहुंचता है, तो MCD को हर महीने करीब 10 लाख रुपये और सालाना 2 से 2.5 करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है।
इसमें संचालन करने वाली संस्थाओं को प्रति दाह संस्कार निर्धारित मुआवजा भी शामिल होगा। ऐसे में पर्यावरणीय लक्ष्य और वित्तीय संतुलन दोनों को साधना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी।
साफ हवा की दिशा में एक कदम
यह पहल न केवल प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में अहम मानी जा रही है, बल्कि सामाजिक रूप से भी राहत देने वाला फैसला है। यदि लोग इस विकल्प को अपनाते हैं, तो राजधानी में प्रदूषण कम करने की मुहिम को नई गति मिल सकती है।