Cold Disease Alert: युवाओं के लिए नया खतरा, हो जाएं सावधान! तेजी से फैल रही यह बीमारी, इन संकेतों को...

Edited By Updated: 27 Jan, 2026 10:01 AM

cold urticaria disease is increasing rapidly among soldiers

जैसे-जैसे पारा गिरता है सेहत से जुड़ी परेशानियां बढ़ने लगती हैं। अक्सर लोग सर्दी-जुकाम को ही ठंड की मुख्य बीमारी मानते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि कड़ाके की ठंड आपकी त्वचा पर भी हमला कर सकती है? इसे आयुर्वेद में शीत पित्ती और मेडिकल भाषा में कोल्ड...

Cold Urticaria: जैसे-जैसे पारा गिरता है सेहत से जुड़ी परेशानियां बढ़ने लगती हैं। अक्सर लोग सर्दी-जुकाम को ही ठंड की मुख्य बीमारी मानते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि कड़ाके की ठंड आपकी त्वचा पर भी हमला कर सकती है? इसे आयुर्वेद में शीत पित्ती और मेडिकल भाषा में कोल्ड अर्टिकेरिया (Cold Urticaria) कहा जाता है। अगर आपकी स्किन भी ठंड के संपर्क में आते ही लाल होकर सूज जाती है तो यह आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

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क्या है शीत पित्ती (Cold Urticaria)?

शीत पित्ती त्वचा की एक ऐसी स्थिति है जिसमें ठंडी हवा, ठंडे पानी या ठंडी वस्तुओं के संपर्क में आने पर शरीर पर लाल-गुलाबी रंग के उभरे हुए चकत्ते (Hives) बन जाते हैं। इसके लक्षण ठंड के संपर्क में आने के कुछ ही मिनटों के भीतर दिखाई देने लगते हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि जब प्रभावित व्यक्ति गर्म माहौल में जाता है तो कई बार खुजली और सूजन कम होने के बजाय और ज्यादा बढ़ जाती है। यह समस्या युवाओं में अधिक देखी जाती है। कभी-कभी यह वायरल इन्फेक्शन (जैसे हेपेटाइटिस) के संकेतों के रूप में भी उभर सकती है।

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क्यों होती है यह समस्या?

विशेषज्ञों के अनुसार इसका कोई एक सटीक कारण बताना मुश्किल है लेकिन कुछ मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

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  1. पित्त दोष: आयुर्वेद के अनुसार शरीर में पित्त तत्व के असंतुलन के कारण त्वचा पर यह प्रतिक्रिया होती है।

  2. हिस्टामाइन का रिसाव: ठंड के संपर्क में आने पर शरीर की कोशिकाएं हिस्टामाइन नामक रसायन छोड़ती हैं जिससे त्वचा में सूजन और खुजली होती है।

  3. अन्य बीमारियां: कई बार यह कैंसर या जेनेटिक समस्याओं के शुरुआती लक्षणों के रूप में भी प्रकट हो सकता है।

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बचाव के आसान और असरदार उपाय

शीत पित्ती से बचने का सबसे अच्छा तरीका सावधानी है। इन बातों का खास ख्याल रखें:

  • पूरा ढककर रखें शरीर: सर्दी में बाहर निकलते समय दस्ताने, मोजे और गर्म कपड़े जरूर पहनें ताकि सीधी ठंडी हवा स्किन को न छुए।

  • गुनगुने पानी का प्रयोग: हाथ धोने या नहाने के लिए ठंडे पानी के बजाय हमेशा गुनगुने (Lukewarm) पानी का इस्तेमाल करें।

  • खान-पान पर नियंत्रण: फ्रिज का ठंडा पानी, कोल्ड ड्रिंक्स और आइसक्रीम जैसी चीजों से पूरी तरह परहेज करें।

  • स्विमिंग से बचें: ठंडे स्विमिंग पूल या नदियों में अचानक छलांग न लगाएं, यह खतरनाक हो सकता है।

  • मॉइस्चराइजर: त्वचा को रूखेपन से बचाने के लिए बिना खुशबू (Fragrance-free) वाले मॉइस्चराइजर का प्रयोग करें।

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