Edited By Sanjeev,Updated: 07 Sep, 2026 04:18 PM

कांग्रेस ने राज्य प्रभारी बदल कर संगठन की कुर्सियां ही नहीं बदली बल्कि हर राज्य के लिए सियासी जिम्मेवारी तय कर दी है। कांग्रेस के सामने 2027 के विधानसभा चुनाव सहित 2029 के लोकसभा चुनाव की जमीन तैयार करने की भी चुनौती है। पंजाब में सचिन पायलट की...
नई दिल्ली : कांग्रेस ने राज्य प्रभारी बदल कर संगठन की कुर्सियां ही नहीं बदली बल्कि हर राज्य के लिए सियासी जिम्मेवारी तय कर दी है। कांग्रेस के सामने 2027 के विधानसभा चुनाव सहित 2029 के लोकसभा चुनाव की जमीन तैयार करने की भी चुनौती है। पंजाब में सचिन पायलट की तैनाती, गुजरात में रणदीप सुरजेवाला को कमान और असम में भूपेश बघेल की नई नियुक्ति बताती है कि पार्टी ने प्रभारी नहीं, मिशन बनाया है।
पंजाब : पहले 'घर' संभालना होगा, फिर विरोधी
सचिन पायलट को पंजाब भेजना सिर्फ चुनावी नियुक्ति नहीं, संगठन संभालने की कोशिश है। पंजाब के नेताओं से राहुल गांधी की बैठक के अगले दिन बदलाव बताता है कि हाईकमान ने राजनीतिक फीडबैक के आधार पर फैसला लिया। यानी पंजाब में मिशन साफ है कि पहले घर संभालो, फिर चुनावी मैदान में उतरो।
महाराष्ट्र : नए चेहरे से संगठन का रीसेट
डॉ. सिरिवेल्ला प्रसाद की नियुक्ति पुराने समीकरणों से आगे बढ़ संगठन को नए सिरे से साधने का संकेत है। कांग्रेस को यहां सहयोगी दलों के बीच राजनीतिक स्पेस भी बचाना है।
गुजरात : कर्नाटक को सुलझाने से बड़ा भरोसा
रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कर्नाटक जैसे राज्य में बिना किसी विरोध के लीडरशिप बदलाव कर हाईकमान का भरोसा जीता है। इसीलिए गुजरात का प्रभार देना 2027 विधानसभा चुनाव की शुरुआती तैयारी का संकेत है। भाजपा के मजबूत गढ़ में कांग्रेस को संगठन, सामाजिक समीकरण और चुनावी नैरेटिव तीनों पर काम करना होगा।
आंध्र प्रदेश : कमजोर जमीन पर नई बिसात
आंध प्रदेश में नए प्रभारी को स्थानीय नेतृत्व खड़ा करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और क्षेत्रीय राजनीति के बीच पार्टी की पहचान मजबूत करने की चुनौती होगी।
असम : बघेल के लिए है यह 'री-डिप्लॉयमेंट'
भूपेश बघेल को पंजाब से हटाकर असम भेजना इस फेरबदल का सबसे दिलचस्प संकेत है। इसे पंजाब में असफलता की सजा मानना जल्दबाजी होगी। अलग राजनीतिक मैदान में तैनाती एक तरह की 'री-डिप्लॉयमेंट' है। संदेश यह कि पार्टी किसी नेता की उपयोगिता को सिर्फ एक राज्य के प्रदर्शन से तय नहीं कर रही।
छत्तीसगढ़ : हार के बाद संगठन रिवाइवल ड्यूटी
सुखदेव भगत की नियुक्ति राज्य में सत्ता गंवाने के बाद संगठन को फिर सक्रिय करने की कवायद है। यहां मिशन सत्ता की लड़ाई से पहले संगठन की मरम्मत है।