Edited By Sahil Kumar,Updated: 05 Aug, 2026 02:29 PM

कांग्रेस ने बुधवार को आरोप लगाया कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण (ई20) की व्यवस्था ने आम और मध्यम वर्ग के लोगों से ईंधन से जुड़ा विकल्प छीन लिया है और इस पूरी व्यवस्था का लाभ केवल एथनॉल उत्पादकों को मिल रहा है।
नई दिल्लीः कांग्रेस ने बुधवार को आरोप लगाया कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण (ई20) की व्यवस्था ने आम और मध्यम वर्ग के लोगों से ईंधन से जुड़ा विकल्प छीन लिया है और इस पूरी व्यवस्था का लाभ केवल एथनॉल उत्पादकों को मिल रहा है।
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने 'एक्स' पर पोस्ट कर यह दावा भी किया कि मार्च, 2025 से देश के सामान्य पेट्रोल पंपों पर प्रभावी रूप से केवल ई20 पेट्रोल की ही आपूर्ति की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री ने दावा किया था कि एथनॉल मिश्रण से डीजल की कीमत 50 रुपये प्रति लीटर तक आ जाएगी और पेट्रोल का विकल्प 55 रुपये प्रति लीटर की दर से उपलब्ध होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
रमेश ने दावा किया कि एक स्वतंत्र विश्लेषण के अनुसार, अप्रैल 2023 से मार्च 2026 के बीच एथनॉल मिश्रित ईंधन से होने वाले कम माइलेज की भरपाई करने के कारण उपभोक्ताओं को सामूहिक रूप से लगभग 88,234 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ा। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि उपभोक्ता अब ई20 पेट्रोल के लिए पहले के सामान्य पेट्रोल की तुलना में अधिक भुगतान कर रहे हैं। उनका कहना, ''सरकार ई20 के खुदरा मूल्य में कमी कर कम माइलेज से होने वाले नुकसान की भरपाई कर सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।''
रमेश ने दावा किया कि नीति आयोग के एथनॉल रोडमैप में ई10 और ई20 ईंधन पर उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए कर एवं वित्तीय प्रोत्साहन देने की सिफारिश की गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बजाय केंद्र सरकार ने एथनॉल उत्पादकों के लिए 4,000 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी को मंजूरी दी, जिससे ई20 कार्यक्रम का लाभ उपभोक्ताओं के बजाय उद्योग जगत को मिला। सरकार की ओर से ई20 से जुड़े कांग्रेस के इन आरोपों पर फिलहाल अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।