Edited By Rohini Oberoi,Updated: 27 Feb, 2026 10:54 AM

भारत में फलों की बात हो और केले का जिक्र न आए ऐसा हो नहीं सकता। लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश का एक शहर ऐसा भी है जिसे 'बनाना कैपिटल ऑफ इंडिया' (Banana Capital of India) कहा जाता है? हम बात कर रहे हैं महाराष्ट्र के जलगांव की। शुष्क मौसम होने के...
Banana Capital of India Jalgaon : भारत में फलों की बात हो और केले का जिक्र न आए ऐसा हो नहीं सकता लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश का एक शहर ऐसा भी है जिसे 'बनाना कैपिटल ऑफ इंडिया' (Banana Capital of India) कहा जाता है? हम बात कर रहे हैं महाराष्ट्र के जलगांव की। शुष्क मौसम होने के बावजूद यहां के किसानों ने अपनी मेहनत और आधुनिक तकनीक के दम पर केले की खेती में एक मिसाल पेश की है।
ड्रिप इरिगेशन: कम पानी, ज्यादा मुनाफा
जलगांव की सफलता का सबसे बड़ा राज है 'ड्रिप इरिगेशन' (टपक सिंचाई)। यहां के किसानों ने परंपरागत खेती को छोड़कर इजरायली तकनीक को अपनाया है। इस तकनीक से पानी सीधे पौधों की जड़ों तक बूंद-बूंद पहुंचता है, जिससे पानी की बर्बादी नहीं होती। कम पानी में भी यहां हर साल औसतन 70 टन प्रति हेक्टेयर केला उत्पादन होता है जो देश के कई अन्य राज्यों की तुलना में काफी ज्यादा है।
मिठास और गुणवत्ता की पहचान: मिला है GI टैग
जलगांव के केले सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी पसंद किए जाते हैं।
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खास स्वाद: यहां की मिट्टी और खेती के तरीके के कारण केले आकार में बड़े और स्वाद में अधिक मीठे होते हैं।
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GI टैग की शक्ति: जलगांव के केले को भौगोलिक संकेत (GI Tag) मिला हुआ है। यह टैग इस बात का प्रमाण है कि यहां जैसा केला दुनिया में कहीं और नहीं मिलता। इससे किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर दाम और खास पहचान मिलती है।
अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार
जलगांव से हर रोज सैकड़ों ट्रक केला देश के विभिन्न कोनों, जैसे दिल्ली, पंजाब और उत्तर प्रदेश के थोक बाजारों में भेजा जाता है। पूरे साल मांग रहने के कारण किसानों की आय का यह एक स्थायी स्रोत बन गया है। भारत दुनिया के सबसे बड़े केला उत्पादक देशों में शामिल है और इस गौरव को बनाए रखने में जलगांव का सबसे महत्वपूर्ण योगदान है।