Edited By Mansa Devi,Updated: 31 Mar, 2026 05:25 PM

1 अप्रैल 2026 से देशभर में पेट्रोल पंपों पर E20 पेट्रोल की बिक्री अनिवार्य कर दी गई है। सरकार के इस फैसले का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात को कम करना, किसानों की आय बढ़ाना और प्रदूषण को घटाना है।
नेशनल डेस्क: 1 अप्रैल 2026 से देशभर में पेट्रोल पंपों पर E20 पेट्रोल की बिक्री अनिवार्य कर दी गई है। सरकार के इस फैसले का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात को कम करना, किसानों की आय बढ़ाना और प्रदूषण को घटाना है। हालांकि इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ सकता है, जिनके पास 2023 से पहले की पुरानी कार या दोपहिया वाहन हैं।
क्या है E20 पेट्रोल?
E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। एथेनॉल एक प्रकार का अल्कोहल है, जो गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। इस मिश्रण से ईंधन की गुणवत्ता बेहतर होती है, इंजन स्मूद चलता है और नॉकिंग की समस्या कम होती है। सरकार के अनुसार, अप्रैल 2023 के बाद बनी BS6 फेज-2 गाड़ियां E20 पेट्रोल के अनुसार डिजाइन की गई हैं, इसलिए इन वाहनों पर इसका कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।
पुरानी गाड़ियों पर क्या होगा असर?
2023 से पहले बनी गाड़ियों के लिए E20 पेट्रोल कुछ चुनौतियां ला सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे वाहनों का माइलेज 3 से 7 प्रतिशत तक कम हो सकता है। इसके अलावा एथेनॉल के कारण पुराने रबर पार्ट्स और फ्यूल पाइप जल्दी खराब हो सकते हैं।एथेनॉल में नमी सोखने की क्षमता होती है, जिससे फ्यूल टैंक में पानी जमा होने का खतरा बढ़ जाता है। इससे इंजन स्टार्ट होने में दिक्कत आ सकती है और जंग लगने की संभावना भी बढ़ती है। हालांकि अब तक E20 पेट्रोल से किसी बड़े इंजन फेलियर की पुष्टि नहीं हुई है।
क्यों जरूरी है एथेनॉल ब्लेंडिंग?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में एथेनॉल ब्लेंडिंग से विदेशी मुद्रा की बचत होगी और देश की ऊर्जा निर्भरता कम होगी। इसके साथ ही यह पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद है, क्योंकि इससे कार्बन उत्सर्जन कम होता है। इसके अलावा एथेनॉल उत्पादन से किसानों को भी सीधा लाभ मिलता है, जिससे उनकी आय बढ़ाने में मदद मिलती है।
नुकसान से कैसे बचें?
अगर आपकी गाड़ी पुरानी है, तो कुछ आसान सावधानियां अपनाकर आप E20 पेट्रोल से होने वाले नुकसान को कम कर सकते हैं। वाहन में E20 कम्पैटिबल रबर पाइप लगवाना बेहतर रहेगा। फ्यूल स्टेबलाइजर का इस्तेमाल करने से नमी बनने से बचाव होता है।
इसके अलावा समय-समय पर फ्यूल फिल्टर बदलते रहें, ताकि गंदगी इंजन तक न पहुंचे। कोशिश करें कि गाड़ी की टंकी ज्यादा खाली न रखें, क्योंकि खाली टंकी में नमी बनने की संभावना बढ़ जाती है।
वाहन को नियमित रूप से चलाना भी जरूरी है, क्योंकि लंबे समय तक गाड़ी खड़ी रहने से समस्या बढ़ सकती है। साथ ही, धातु के टैंक को जंग से बचाने के लिए एंटी-कोरोजन ट्रीटमेंट कराना भी फायदेमंद साबित हो सकता है। कुल मिलाकर, E20 पेट्रोल पर्यावरण और देश की अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद कदम है, लेकिन पुरानी गाड़ियों के मालिकों को थोड़ी अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होगी।