Edited By Sahil Kumar,Updated: 11 Feb, 2026 06:29 PM

जनवरी 2026 में सोने और चांदी के ETF में रिकॉर्ड निवेश देखा गया। AMFI के आंकड़ों के अनुसार, कुल एसेट्स 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गए। गोल्ड ETF के फोलियो 1.14 करोड़ और सिल्वर ETF के फोलियो 47.85 लाख तक बढ़े। इस महीने गोल्ड ETF में 24,039 करोड़...
नेशनल डेस्कः वैश्विक अनिश्चितताओं और बाजार की उठापटक के बीच निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर तेजी से लौट रहे हैं। जनवरी 2026 में सोने और चांदी के एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETF) में भारी निवेश आया, जिससे इन फंड्स के कुल एसेट्स 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गए, जो अब तक का सबसे बड़ा स्तर है।
गोल्ड और सिल्वर ETF में भारी निवेश
पिछले पांच महीनों में गोल्ड और सिल्वर ETF में भारी निवेश आया है, जिसके चलते कुल एसेट्स लगभग तीन गुना बढ़ गए हैं। AMFI के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2025 में कुल एसेट्स करीब 1 लाख करोड़ रुपये थे, जो जनवरी 2026 तक 3 लाख करोड़ रुपये से ऊपर पहुँच गए। निवेशकों की भागीदारी भी इस दौरान बढ़ी है। गोल्ड ETF के फोलियो संख्या 80.34 लाख से बढ़कर 1.14 करोड़ हो गए, जबकि सिल्वर ETF के फोलियो 11.31 लाख से बढ़कर 47.85 लाख तक पहुंच गए। यह क्रमशः 43% और 323% की बढ़त दर्शाता है।
गोल्ड ETF में 24,039 करोड़ रुपये का निवेश
जनवरी 2026 में रिकॉर्ड निवेश ने एसेट्स में बढ़ोतरी का मुख्य आधार बनाया। इस महीने गोल्ड ETF में 24,039 करोड़ रुपये का निवेश हुआ, जबकि सिल्वर ETF में 9,463 करोड़ रुपये आए। यह निवेश राशि इक्विटी फंड्स में आए 24,029 करोड़ रुपये से भी अधिक है। दिसंबर 2025 में, गोल्ड और सिल्वर ETF में कुल मिलाकर 15,609 करोड़ रुपये का निवेश हुआ था, जबकि इक्विटी फंड्स में 28,055 करोड़ रुपये आए थे।
SMC ग्लोबल सिक्योरिटीज के CEO अजय गर्ग ने बताया कि गोल्ड और सिल्वर ETF में बढ़ता निवेश शेयर बाजार में बड़ी गिरावट का संकेत नहीं है। उनका कहना है कि निवेशक अस्थिर बाजार और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित विकल्पों की ओर जा रहे हैं। उन्होंने सलाह दी कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए पोर्टफोलियो का 10-15% हिस्सा सोने और चांदी में निवेश करना सुरक्षित माना जाता है। सिल्वर ETF में भी निवेशकों की रुचि बढ़ी है। पिछले साल चांदी की कीमतों में तेजी और फंड्स के बेहतर रिटर्न ने निवेशकों को आकर्षित किया। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, 2025 में सेंट्रल बैंकों की सोने की खरीद 1,000 टन से कम रही, जिससे यह स्पष्ट होता है कि हाल की तेजी मुख्य रूप से निवेशकों के कारण आई।
चॉइस वेल्थ के CEO निकुंज सराफ ने कहा कि सोने और चांदी में हालिया निवेश अधिकतर शॉर्ट-टर्म रिटर्न की तलाश और रणनीति के तहत हुआ है। उनका मानना है कि ये धातुएं पोर्टफोलियो को स्थिर बनाने में मदद करती हैं, न कि बड़ी मुनाफा देने वाली एसेट के रूप में।