Gold-Silver ETF: सोने-चांदी की चमक लौटी: गिरावट के बाद निवेशकों की चांदी, ETF में आया तगड़ा उछाल

Edited By Updated: 09 Feb, 2026 04:13 PM

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बाजार में पिछले कुछ दिनों से जारी उथल-पुथल के बाद अब कीमती धातुओं के दिन फिरते नजर आ रहे हैं। सोमवार की सुबह निवेशकों के लिए खुशियां लेकर आई, क्योंकि सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर जोरदार रिकवरी दर्ज की गई है। पिछले कुछ सत्रों में जो मुनाफा...

नेशनल डेस्क: बाजार में पिछले कुछ दिनों से जारी उथल-पुथल के बाद अब कीमती धातुओं के दिन फिरते नजर आ रहे हैं। सोमवार की सुबह निवेशकों के लिए खुशियां लेकर आई, क्योंकि सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर जोरदार रिकवरी दर्ज की गई है। पिछले कुछ सत्रों में जो मुनाफा बाजार की अस्थिरता की भेंट चढ़ गया था, उसकी भरपाई अब तेजी से हो रही है। इस सुधार का सबसे बड़ा असर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) पर देखने को मिला, जहां निवेशकों ने जमकर खरीदारी की।

वायदा बाजार में दिखा दम
महीने की शुरुआत में आई गिरावट को पीछे छोड़ते हुए वायदा बाजार में शानदार बढ़त देखी गई। अप्रैल में मैच्योर होने वाला सोना करीब 2% की मजबूती के साथ 1,58,500 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर को छू गया। इसी तरह जून के कॉन्ट्रैक्ट्स में भी उत्साह बना रहा। लेकिन असली बाजी चांदी ने मारी। मार्च एक्सपायरी वाली चांदी की कीमतों में लगभग 6% की भारी तेजी आई, जिससे इसके भाव 2,64,885 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए। मई के कॉन्ट्रैक्ट्स में भी 4% तक का इजाफा देखा गया, जो बाजार में लौटते भरोसे का संकेत है।

सिल्वर और गोल्ड ETF में जबरदस्त तेजी
कीमतों में सुधार का सीधा फायदा म्यूचुअल फंड और ETF निवेशकों को हुआ। सिल्वर ETF के सेगमेंट में तो जैसे पंख लग गए। UTI और निप्पॉन इंडिया जैसे सिल्वर ETF में 10% से 11% तक की रिकॉर्ड बढ़त देखी गई। वहीं HDFC, टाटा और जेरोधा समेत अन्य प्रमुख फंड हाउसेस के सिल्वर ETF भी 8% से 10% के बीच चढ़े रहे। सोने के ETF भी पीछे नहीं रहे; यूनियन और एंजेल वन जैसे गोल्ड ETF में 3% से ज्यादा की मजबूती आई, जबकि SBI और कोटक जैसे बड़े फंड्स में 2% से अधिक का सुधार दर्ज किया गया।

क्यों हो रहा था उतार-चढ़ाव?
कीमती धातुओं में हालिया गिरावट की मुख्य वजह अमेरिका से जुड़ी कुछ बड़ी खबरें थीं। दरअसल, CME ग्रुप ने ट्रेडिंग के लिए मार्जिन की सीमा बढ़ा दी थी, जिसकी वजह से बड़े ट्रेडर्स को मजबूरी में अपनी पोजीशन बेचनी पड़ी। इसके साथ ही, अमेरिका में केविन वॉर्श को अगले फेडरल रिजर्व चेयरमैन के तौर पर नामांकित किए जाने की खबर ने भी बाजार को प्रभावित किया। वॉर्श को डॉलर की मजबूती और सख्त ब्याज दरों का समर्थक माना जाता है, जिससे सोने-चांदी पर दबाव बढ़ा था। हालांकि, अब बाजार उन झटकों से उबर कर रिकवरी की राह पर है।

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