मिडिल ईस्ट तनाव का असर, पड़ोसी देशों में गहराया ईंधन संकट, कहीं 4 दिन काम तो कहीं स्कूल बंद

Edited By Updated: 18 Mar, 2026 06:09 PM

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मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और तेल सप्लाई में आई बाधाओं का असर अब वैश्विक स्तर पर दिखने लगा है। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव भारत के पड़ोसी देशों—श्रीलंका, पाकिस्तान और बांग्लादेश—पर पड़ा है, जहां ईंधन संकट गहराता जा रहा है। बढ़ती तेल कीमतें,...

बिजनेस डेस्कः मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और तेल सप्लाई में आई बाधाओं का असर अब वैश्विक स्तर पर दिखने लगा है। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव भारत के पड़ोसी देशों—श्रीलंका, पाकिस्तान और बांग्लादेश—पर पड़ा है, जहां ईंधन संकट गहराता जा रहा है। बढ़ती तेल कीमतें, सप्लाई में देरी और बढ़ते आयात खर्च ने इन देशों की अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बना दिया है।

श्रीलंका: ईंधन बचाने के लिए 4 दिन का वर्किंग वीक

आर्थिक संकट से उबर रहे श्रीलंका ने ईंधन खपत कम करने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। सरकारी कर्मचारियों के लिए 4 दिन का कार्य सप्ताह लागू किया गया है। इसके साथ ही QR कोड आधारित फ्यूल राशनिंग सिस्टम जारी है, जिससे वाहनों को सीमित मात्रा में ही ईंधन मिल पा रहा है। सरकार ने सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देते हुए निजी वाहनों के इस्तेमाल पर भी नियंत्रण बढ़ाया है।

बांग्लादेश: खर्च में कटौती, ऊर्जा बचत पर जोर

बांग्लादेश सरकार ने ऊर्जा संकट से निपटने के लिए सख्ती बढ़ा दी है। सरकारी दफ्तरों के काम के घंटे घटा दिए गए हैं और एयर कंडीशनिंग के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है। गैर-जरूरी विदेशी दौरों पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसके अलावा डीजल आधारित पावर प्लांट्स की क्षमता घटाकर वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

पाकिस्तान: बड़े आयोजन रद्द, ईंधन कटौती

पाकिस्तान ने भी इस संकट से निपटने के लिए कई कड़े फैसले लिए हैं। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पाकिस्तान डे पर होने वाली परेड और अन्य बड़े कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं। सरकारी अधिकारियों के लिए ईंधन आपूर्ति सीमित कर दी गई है और पेट्रोल-डीजल भत्ते में 50% तक कटौती की गई है। कई जगहों पर स्कूल-कॉलेज बंद किए गए हैं और सरकारी दफ्तरों में वर्क फ्रॉम होम लागू किया गया है। सांस्कृतिक कार्यक्रम भी स्थगित कर दिए गए हैं।

क्यों गहराया संकट?

विशेषज्ञों के अनुसार, तेल सप्लाई के प्रमुख मार्गों में रुकावट और बढ़ते वैश्विक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता बढ़ी है। इससे आयात पर निर्भर देशों की लागत बढ़ गई है और उनके विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ा है।

अगर हालात लंबे समय तक बने रहे, तो इन देशों में महंगाई और बढ़ सकती है और आम जनता पर इसका असर और गहरा हो सकता है। फिलहाल, सरकारें सख्त कदम उठाकर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही हैं।

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