Edited By Tanuja,Updated: 10 Jun, 2026 04:15 PM

भारत के हरियाणा राज्य के करनाल के 24 वर्षीय गौरव की अमेरिका में ट्रक दुर्घटना में मौत हो गई। परिवार ने उसे डंकी रूट से अमेरिका भेजने के लिए 50 लाख रुपए खर्च किए थे। अब शव को भारत लाने में भी 25 लाख रुपए खर्च करने पड़े। इकलौते बेटे की मौत से परिवार...
International Desk: विदेश में सुनहरे भविष्य का सपना लेकर घर से निकला इकलौता बेटा कभी लौटकर मां-बाप का सहारा बनेगा, परिवार ने यही उम्मीद लगाई थी। उसके लिए खेत-खलिहान नहीं, बल्कि प्लॉट और दुकान तक बेच दी गईं। करीब 50 लाख रुपये खर्च कर उसे अमेरिका भेजा गया, ताकि वह परिवार की तकदीर बदल सके। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। हरियाणा के Karnal जिले के बालरागड़ान गांव में उस समय मातम छा गया, जब 24 वर्षीय गौरव का शव अमेरिका से उसके गांव पहुंचा। जिस बेटे को बेहतर भविष्य और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए विदेश भेजा गया था, वह दो साल बाद ताबूत में लिपटकर वापस लौटा।
सोमवार देर शाम गौरव का शव अमेरिका से दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा, जहां से एम्बुलेंस के जरिए उसे गांव लाया गया। बेटे का शव देखते ही उसकी मां और बहन बेसुध होकर जमीन पर गिर पड़ीं। पूरे गांव में शोक का माहौल है। गौरव के पिता रामफल के अनुसार, उनका बेटा अमेरिका के California में ट्रक चालक के रूप में काम कर रहा था। 26 मई को गौरव ने अपने पिता को आखिरी बार फोन किया था। उसने बताया था कि वह ट्रक लेकर डिलीवरी के लिए जा रहा है और रास्ते में एक रेस्टोरेंट पर चाय पीने के लिए रुका है। उसने कहा था कि कुछ देर बाद फिर बात करेगा। लेकिन वह बातचीत आखिरी साबित हुई।परिजनों के मुताबिक, अमेरिकी पुलिस अधिकारियों ने उन्हें बताया कि रेस्टोरेंट से निकलने के कुछ समय बाद गौरव के ट्रक का संतुलन बिगड़ गया। ट्रक सड़क से नीचे खाई में जा गिरा।
हादसा इतना गंभीर था कि गौरव की मौके पर ही मौत हो गई। 27 मई को अमेरिकी अधिकारियों ने परिवार को फोन कर इस दुखद घटना की जानकारी दी। गौरव की मौत के बाद परिवार के सामने एक और बड़ी चुनौती खड़ी हो गई उसका शव भारत लाना। परिवार का कहना है कि उन्होंने विभिन्न प्रशासनिक अधिकारियों और संबंधित संस्थाओं से सहायता मांगी, लेकिन कोई ठोस मदद नहीं मिल सकी। अंततः अमेरिका में रहने वाले कुछ भारतीय परिचितों की मदद से शव को भारत भेजने की व्यवस्था की गई परिजनों के अनुसार, शव को अमेरिका से भारत लाने में लगभग 25 लाख रुपए खर्च हुए। गौरव के पिता रामफल ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए बेटे ने अमेरिका जाने का फैसला किया था।
उन्होंने कहा कि उन्होंने बेटे को रोकने की कोशिश की थी, लेकिन गौरव अमेरिका जाने के लिए दृढ़ था। आखिरकार एक एजेंट के माध्यम से उसे डंकी रूट के जरिए अमेरिका भेजा गया। परिवार ने इसके लिए करीब 50 लाख रुपए खर्च किए। इतनी बड़ी रकम जुटाने के लिए उन्हें अपना प्लॉट और दुकान तक बेचनी पड़ी। करीब छह महीने की कठिन और जोखिम भरी यात्रा के बाद गौरव अमेरिका पहुंचा था। रामफल के पास लगभग दो एकड़ कृषि भूमि है और परिवार की आय का मुख्य स्रोत खेती है। गौरव परिवार का इकलौता बेटा था। उसकी एक छोटी बहन है, जिसकी शादी करीब एक वर्ष पहले हो चुकी है। अब घर में केवल माता-पिता ही रह गए हैं।
डंकी रूट के खतरों की एक और कहानी
गौरव की मौत ने एक बार फिर डंकी रूट के जरिए विदेश जाने के बढ़ते चलन और उससे जुड़े जोखिमों को सामने ला दिया है। बेहतर भविष्य और अधिक कमाई के सपने में कई परिवार अपनी जीवनभर की जमा पूंजी खर्च कर देते हैं, लेकिन कई बार यह सपना भारी आर्थिक नुकसान और पारिवारिक त्रासदी में बदल जाता है।बालरागड़ान गांव में गौरव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। पिता ने कांपते हाथों से अपने इकलौते बेटे को मुखाग्नि दी। गांव के लोगों का कहना है कि यह घटना उन परिवारों के लिए बड़ी चेतावनी है, जो किसी भी कीमत पर विदेश पहुंचने का सपना देख रहे हैं।