Gold Price Crash : अचानक गिरे सोने-चांदी के भाव, तुरंत उठा लें फायदा... जानें अब के नए रेट

Edited By Updated: 17 Jun, 2026 07:21 PM

gold drops by 4 800 silver becomes cheaper by 5 300

राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में बुधवार को सोने की कीमतें 4,800 रुपये गिरकर 1.54 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम रह गईं, जबकि चांदी की कीमत में 5,300 रुपये की गिरावट दर्ज हुई। मजबूत रुपये और कमजोर वैश्विक रुख के बीच कारोबारियों ने कीमती धातुओं से...

नेशनल डेस्क : राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में बुधवार को सोने की कीमतें 4,800 रुपये गिरकर 1.54 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम रह गईं, जबकि चांदी की कीमत में 5,300 रुपये की गिरावट दर्ज हुई। मजबूत रुपये और कमजोर वैश्विक रुख के बीच कारोबारियों ने कीमती धातुओं से दूरी बनाए रखी। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 4,800 रुपये टूटकर 1,54,400 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी टैक्स सहित) रह गई।

पिछले सत्र में यह 1,59,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुई थी। चांदी में भी भारी गिरावट आई और यह 5,300 रुपये टूटकर 2,55,400 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स सहित) रह गई। मंगलवार को चांदी 2,60,700 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। बाजार विश्लेषकों ने कहा कि घरेलू मांग लगातार दूसरे दिन कमजोर रही क्योंकि मजबूत शेयर बाजार के बीच निवेशक बेहतर लाभ की तलाश में थे। 

एचडीएफसी सिक्योरिटीज में वरिष्ठ विश्लेषक (जिंस) सौमिल गांधी ने कहा कि बुधवार को सोने की कीमतों में गिरावट आई क्योंकि निवेशकों ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व के मौद्रिक नीति फैसले सहित कई महत्वपूर्ण अमेरिकी आर्थिक कार्यक्रमों से पहले सतर्क रुख अपनाया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में, हाजिर सोना मामूली गिरावट के साथ 4,327.54 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था, जबकि चांदी 0.18 प्रतिशत गिरकर 69.89 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।

मिराए एसेट शेयरखान में जिंस प्रमुख प्रवीण सिंह ने कहा, ''अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी के मौद्रिक नीति फैसले से पहले हाजिर सोना में स्थिरता देखी जा रही है।'' इस बीच, बाजार प्रतिभागियों शुक्रवार को होने वाली अमेरिका-ईरान बैठक से पहले की गतिविधियों पर भी नजर रख रहे हैं। एलकेपी सिक्योरिटीज में उपाध्यक्ष शोध विश्लेषक (जिंस और मुद्रा) जतिन त्रिवेदी ने कहा, ''किसी औपचारिक समझौते की दिशा में कोई भी प्रगति भू-राजनीतिक अनिश्चितता को कम कर सकती है, जबकि रुकावटें कीमती धातुओं की मांग को फिर से बढ़ा सकती हैं।'' 

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