Edited By Radhika,Updated: 11 Apr, 2026 11:58 AM

देश में नौकरीपेशा लोगों के लिए नए लेबर कोड लाए गए हैं। इसी के साथ अब नौकरी वालों के लिए ग्रेच्युटी के नियमों में एक बड़ा बदलाव आया है। इसे पुराने 5 साल वाले रुल से बदलकर 1 साल के लिए कर दिया गया है। हालांकि, यह राहत हर कर्मचारी के लिए नहीं है। आइए...
Gratuity Rules: देश में नौकरीपेशा लोगों के लिए नए लेबर कोड लाए गए हैं। इसी के साथ अब नौकरी वालों के लिए ग्रेच्युटी के नियमों में एक बड़ा बदलाव आया है। इसे पुराने 5 साल वाले रुल से बदलकर 1 साल के लिए कर दिया गया है। हालांकि, यह राहत हर कर्मचारी के लिए नहीं है। आइए समझते हैं कि इस नए नियम का असली खेल क्या है और आपको इसका फायदा कैसे मिलेगा।
क्या है नया नियम?
पुराने नियम के अनुसार पहले अगर कोई व्यक्ति किसी कंपनी या दफ्तर में 5 साल तक नौकरी करता है तो वह ग्रेच्युटी पाने का हकदार होता था। अब सामाजिक सुरक्षा कानून के तहत, कुछ खास श्रेणियों के लिए इस अवधि को घटाकर 1 साल कर दिया गया है।

इन लोगों को भी मिलेगा लाभ
नए नियमों का सबसे बड़ा फायदा फिक्स्ड टर्म (कॉन्ट्रैक्ट) और contract employees को मिलेगा। यानि की जो लोग 1 या 2 साल के कॉन्ट्रैक्ट पर काम करते हैं, वे अब 1 साल की नौकरी पूरी करने के बाद ग्रेच्युटी के हकदार होंगे। पहले यह सुविधा केवल रेगुलर कर्मचारियों के लिए थी, जिससे कॉन्ट्रैक्ट वर्कर खाली हाथ रह जाते थे। यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि स्थायी या रेगुलर कर्मचारियों के लिए अभी भी 5 साल का पुराना नियम ही लागू है। यानी अगर आप कंपनी के परमानेंट रोल पर हैं, तो आपको ग्रेच्युटी के लिए 5 साल की सेवा देनी ही होगी।
बदल जाएगा कैलकुलेशन और सैलरी स्ट्रक्चर
इससे अब आपका सैलरी स्ट्रक्चर और कैलकुलेशन दोनों बदल जाएंगे। हालांकि 1 साल काम करने पर आपको मिलने वाली ग्रेच्युटी की राशि 5 साल के मुकाबले कम होगी, क्योंकि इसका हिसाब आपके काम के महीनों/सालों के आधार पर (Pro-rata basis) लगाया जाएगा।
50% बेसिक सैलरी रुल: अब कंपनियों को कुल सीटीसी (CTC) का कम से कम 50% हिस्सा 'बेसिक सैलरी + डीए' रखना होगा। चूंकि ग्रेच्युटी की गणना बेसिक सैलरी पर होती है, इसलिए बेसिक बढ़ने से आपकी ग्रेच्युटी की रकम में भी इजाफा होगा।