Edited By Anu Malhotra,Updated: 01 Jun, 2026 10:12 AM

ऑनलाइन पैसों का लेनदेन यानि Digital Transaction करने वाले करोड़ों भारतीयों के लिए आज यानी 1 जून से एक बेहद राहत भरी खबर है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने UPI पेमेंट सिस्टम को पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए एक...
टेक डेस्क: ऑनलाइन पैसों का लेनदेन यानि Digital Transaction करने वाले करोड़ों भारतीयों के लिए आज यानी 1 जून से एक बेहद राहत भरी खबर है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने UPI पेमेंट सिस्टम को पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए एक नया नियम लागू कर दिया है।
अक्सर लोगों को किसी अनजान मोबाइल नंबर या दुकान के क्यूआर कोड (QR Code) पर पैसे भेजते समय यह डर सताता था कि पैसा सही व्यक्ति के पास जा रहा है या नहीं। ठगों और जालसाजों के इसी खेल को खत्म करने के लिए अब यूपीआई में Real-time Bank Name Mapping फीचर को शामिल किया गया है। आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि यह नया सिस्टम कैसे काम करेगा।
1. फर्जी 'निकनेम' का खेल खत्म, दिखेगा ऑफिशियल नाम
अब तक जब आप Google Pay, PhonePe या Paytm जैसे ऐप्स के जरिए किसी को पैसे ट्रांसफर करते थे, तो स्क्रीन पर वही नाम दिखाई देता था जो सामने वाले यूजर ने प्रोफाइल बनाते समय खुद लिख रखा होता था। साइबर अपराधी इसका फायदा उठाकर मशहूर कंपनियों या किसी अन्य व्यक्ति का फर्जी नाम लिख लेते थे।
लेकिन नए नियम के तहत, जैसे ही आप किसी का नंबर डालेंगे, आपको उस व्यक्ति का वही असली नाम (Official Registered Name) दिखाई देगा जो उसके बैंक खाते में दर्ज है। यानी अब फर्जी नाम रखकर धोखा देना मुमकिन नहीं होगा।
2. QR कोड स्कैन करते ही खुलेगी पोल
आजकल बाजारों में दुकानों के असली क्यूआर कोड के ऊपर जालसाजों द्वारा अपना फर्जी क्यूआर कोड चिपकाने के मामले काफी बढ़ गए हैं। नए अपडेट के बाद, आप जैसे ही किसी दुकान, पेट्रोल पंप या रेहड़ी-पटरी पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन करेंगे, स्क्रीन पर तुरंत उस व्यक्ति या फर्म के बैंक खाते का असली नाम आ जाएगा। इससे ग्राहक तुरंत पहचान सकेंगे कि दुकानदार का खाता असली है या कोड के साथ कोई छेड़छाड़ हुई है।
3. गलत नंबर पर पैसे ट्रांसफर होने का रिस्क खत्म
कई बार जल्दबाजी में मोबाइल नंबर का कोई एक अंक (Digit) गलत टाइप होने की वजह से पैसे किसी और के खाते में चले जाते थे। अब चूंकि पिन (UPI PIN) दर्ज करने से पहले ही सामने वाले का बैंक-वेरिफाइड नाम स्क्रीन पर आ जाएगा, इसलिए आप भुगतान करने से पहले ही पूरी तरह आश्वस्त हो सकेंगे कि पैसा सही जगह जा रहा है। इससे गलत ट्रांजैक्शन की शिकायतों में भारी कमी आएगी।
बता दें कि NPCI का इसके पीछे मुख्य उद्देश्य Cyber Financial Crimes को जड़ से खत्म करना है। इस नए सिस्टम को सभी सरकारी और निजी बैंकों के साथ-साथ UPI सेवा देने वाले ऐप्स के साथ पूरी तरह लिंक (Sync) कर दिया गया है। 1 जून से यह फीचर सभी प्रमुख ऐप्स पर ऑटोमैटिक तरीके से काम करना शुरू कर देगा और इसके लिए उपभोक्ताओं को कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा।